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________________ (5) नई नियुक्तियाँ - शोध, शिक्षा एवं वर्धमान ग्रन्थगार में निम्न चार विद्वानों की नियुक्तियाँ की गई हैं— 1. श्री रामस्वरूप सोनी - शोधकर्त्ता तथा सहव्याख्याता अंग्रेजी 2. श्री विजयकुमार धर्माधिकारी - प्रवक्ता संस्कृत 3. श्री जगतपाल प्रवक्ता दर्शनशास्त्र 4. श्री सुबोधकुमार मुखर्जी - ग्रन्थागाराध्यक्ष उपर्युक्त विद्वान् आवश्यकतानुसार अध्यापन, शोध एवं अनुवाद कार्य में भी सहयोग करेंगे । ( 6 ) वर्धमान ग्रन्थागार - ग्रन्थागार में सूचीकरण तथा वर्गीकरण का कार्य द्रुतगति से चल रहा है । विगत दिनों में ग्रंथागार के संवर्द्धन हेतु कई नये महत्त्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथों तथा अन्यान्य ग्रंथों को खरीदा गया है, जिनका मूल्य लगभग 20,000 रुपये है । इस समय ग्रंथागार में लगभग 10,500 ग्रंथ हैं ! शिक्षा विभाग - ब्राह्मी विद्यापीठ में इस वर्ष जैन विद्या स्नातकोत्तर तथा जैन - विद्या प्रवेशिका कक्षाएं नवीन खोली गई हैं। नवीन सत्र में प्रवेशिका तथा प्राक्स्नातक प्रथम व द्वितीय वर्ष 15 छात्राओं ने प्रवेश लिया है तथा राजस्थान विश्वविद्यालय की बी. ए. ( प्रथम वर्ष) कक्षा में 9 छात्राओं ने प्रवेश लिया है। स्नातकोत्तर प्रथम वर्म में 12 छात्राएं अध्ययन कर रही हैं । स्नातकोत्तर ( प्रथम एवं द्वितीय वर्ष) के पाठ्यक्रम में निम्नलिखित आठ प्रश्नपत्र रखे गये हैं - 1. अर्धमागधी एवं शौरसेनी आगम । 2. प्राकृत एवं संस्कृत साहित्य | 3. भाष्य एवं टीका साहित्य | 4. तत्त्व मीमांसा तथा न्याय । 5. तुलनात्मक धर्म-दर्शन । 6. इतिहास एवं संस्कृति । 7-8. अप्रकाशित हस्तलिखित ग्रन्थों का अनुवाद तथा शोधपूर्ण सम्पादन । अतिरिक्त पत्र - अंग्रेजी एवं पाश्चात्य दर्शन राजस्थान विश्वविद्यालय की बी० ए० कक्षाओं में अनिवार्य विषयों के अतिरिक्त संस्कृत, राजनीति शास्त्र, दर्शनशान हिन्दी तथा अंग्रेजी, ऐच्छिक विषय भी पढ़ाये जाते हैं । साथ ही छात्राओं के लिए सिलाई, कढ़ाई एवं टंकण जैसी आधुनिक सर्वजनोपयोगी कलाओं का भी ज्ञान कराने की समुचित व्यवस्था की जा रही है। बी. ए. (प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वर्ष) कक्षाओं में क्रमश: 9, 7 एवं 2 छात्राएं अध्ययन कर रही हैं। सभी छात्राओं को कॉलेज में प्रातः 8 बजे से सायं 5 बजे तक रहना अनिवार्य है । उपासक प्रशिक्षण योजना- जैन विश्व भारती की ओर से इस वर्ष से उपासक प्रशिक्षण योजना आरम्भ की गई है। इस योजना के अंतर्गत जैन विश्व भारती के तत्त्वावधान में कुछ प्रमुख उपासक एवं उपासिकाओं के समूह उन क्षेत्रों में जहां साधु-साध्वियों के चातुर्मास नहीं हैं, भिजवाये जायेंगे, जो पर्यूषण पर्व के नवाह्निक कार्यक्रम के सम्पादन में सहयोग करेंगे । खंड ४, अंक २ Jain Education International For Private & Personal Use Only १८३ www.jainelibrary.org
SR No.524515
Book TitleTulsi Prajna 1978 07
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShreechand Rampuriya, Nathmal Tatia, Dayanand Bhargav
PublisherJain Vishva Bharati
Publication Year1978
Total Pages142
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Tulsi Prajna, & India
File Size3 MB
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