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________________ योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा डॉ. वंदना जैन स्वास्थ्य प्रत्येक मनुष्य का जन्मसिद्ध अधिकार है, और | और दूसरी का निर्माण होना इसी चक्र में रोगी फँस जाता है। निरोग रहना मानव शरीर की स्वाभाविक स्थिति है। व्यक्ति कोई नहीं चाहता का शरीर निरोग होने के साथ उसका मन, मस्तिष्क और . . बार बार बीमार होना। आत्मा भी स्वस्थ और उन्नत हो तभी तो संपूर्ण स्वास्थ्य की अस्पतालों के चक्कर काटना। अवस्था होती है। प्राकृतिक जीवन के नियमों के अनुसार . घंटों लाइन में लगना। रहन-सहन, खान-पान तथा दिनचर्या रखने से व्यक्ति स्वयं . शारीरिक व मानसिक परेशानियों से ग्रस्त रहना। ही स्वाभाविक रूप से पूर्ण स्वस्थ रहता है तथा प्रकृति के हर व्यक्ति चाहता है नियमों के विरुद्ध होने पर ही सभी प्रकार के रोग, कष्ट तथा . नित्य स्वस्थ रहना। समस्याएं उत्पन्न होती हैं। . इंजेक्शन, ऑपरेशन आदि से बचना। ___ योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा प्राचीन पद्धतियां हैं, जिनके • एंटीबायोटिक जैसी जहरीली दवाओं से बचना। संदर्भ प्राचीन ग्रंथों में मिलते हैं। आज स्वास्थ्य संरक्षण एवं . पैसा और समय की बर्बादी से बचना। विशेषकर मनोदैहिक विकारों के निवारण में इनकी उपयोगिता योग व प्राकृतिक चिकित्सा में है को देखकर विश्व स्तर पर लोगों में इन चिकित्सा पद्धतियों . रोग को जड़ से मिटाने का उपचार। के प्रति रुचि और जिज्ञासा बढ़ी है। बड़े-बड़े चिकित्सा . रोग प्रतिबंधन का उपचार। अनुसंधान संस्थाओं में कार्यरत वैज्ञानिक एवं चिकित्सक . स्वावलंबन और अहिंसा का विवेक। भी इनकी उपयोगिता को भली-भांति समझकर अपने . रोगी को स्वयं योगी व चिकित्सक बनने के संस्कार , अनुसंधानों द्वारा उनकी उपयोगिता को प्रभावित करने में लगे हुए हैं। योग व प्राकृतिक चिकित्सा वह पद्धति है, जो वर्षों से ____ जनसाधारण में भी इनके प्रति रुचि बढ़ी है और लोग | चली आई है और आज भी जिसका निरंतर विकास जारी है, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा को अपने जीवन में अपनाने जो एक अति वैज्ञानिक प्रणाली है और जिसमें निदान डॉक्टर की बात गंभीरता से सोचने लगे हैं, क्योंकि योग एवं प्राकतिक दवाईयाँ और अस्पताल प्रधान ना होकर मरीज या कष्ट चिकित्सा प्रणाली अपने आप में प्रकृति का विज्ञान है। इस पीड़ित व्यक्ति प्रधान होता है तथा उसका कष्ट जड़ से दूर विज्ञान में प्रकृति के नियमों द्वारा अस्वस्थ व्यक्ति स्वस्थ हो | करने का प्रयास किया जाता है। इसमें रोग के वास्तविक सकता है और स्वस्थ रह सकता है। कारण की खोज की जाती है और कष्ट को दूर करने के ____ आज ज्यादातर लोग इंजेक्शनों और जहरीली दवाओं के | लिए सबसे सरल, सबसे प्राकृतिक तथा सर्वाधिक वृद्धि शिकार हैं एवं इसके आदी हो गए हैं। इनमें तुरंत ठीक होने | संगत उपाय किए जाते हैं। यह सिर्फ एक चिकित्सा पद्धति का चमत्कार दिखता है, अतः सामान्य लोग इस ओर आकर्षित | ही नहीं वरन् एक संपूर्ण जीवनदर्शन है व स्वस्थ जीवन जीने होते हैं, किन्तु अब इनके पार्श्व प्रभाव सामने आने से इस | की कला है। चमत्कार की असलियत सामने आने लगी है। इन जहरीली योग विज्ञान विभाग दवाओं से बीमारी दबा दी जाती है। एक बीमारी का दबना डॉ. हरीसिंह गौर वि.वि.,सागर (म. प्र.) • क्रोध अनेक पापों का जनक है; उसका परित्याग करके जीवदया में प्रवृत्त होना चाहिए। Anger sires several sins. It must be renounced and kindness towards all the living beings adopted. मारने का विचार, ईर्ष्या और डाह आदि अशुभ मनोयोग हैं। The thought of killing, jealousy and malice are the inauspicious mental activities. 'वीरदेशना' से साभार 26/मार्च 2006 जिनभाषित - Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.524305
Book TitleJinabhashita 2006 03
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRatanchand Jain
PublisherSarvoday Jain Vidyapith Agra
Publication Year2006
Total Pages36
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Jinabhashita, & India
File Size5 MB
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