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________________ भावी जीवन बनाने में विशेष रूप से मदद करती है। | दबाव होता है, वे व्यायाम न करें। समय एवं परिस्थितियों इसलिए इस समय अच्छी पुस्तकें पढ़ना चाहिए और पवित्र के अनुसार योगासन का चुनाव करें। सूक्ष्म व्यायाम की तथा उच्च विचार रखकर एक आनंददायक वातावरण में सारी क्रियाएँ की जा सकती हैं। सूर्यनमस्कार (परमेष्ठी रहना चाहिए। इसी के साथ भय, उत्कन्ठा, दुश्चिता और नमस्कार) भी किया जा सकता है, किन्तु स्थिति नं. 2 हर तरह की उत्तेजना का पूर्ण रूप से बहिष्कार करना (अर्थात् पर्वतआसन) पर जोर न दें। जरूरी है। हर समय प्रसव-समय की विपत्तियों के बारे में ___डॉ. ओमप्रकाश आनंद के विचार एवं अनुभव से, तो न सोचें, वरन् यह दोहरायें कि मेरा प्रसव अच्छी तरह से अंग-अंग के सारे व्यायाम (केवल उपनौलि व नौलि को होगा व दृढ़ विश्वास रखें कि सब कुछ स्वाभाविक हो छोड़कर) गर्भवती महिलाएँ कर सकती हैं। उनके अनुसार जायेगा। इससे काफी लाभ पहुँचेगा। सभी प्रकार की उत्तेजना रीढ़ के घुसावदार व्यायाम भी महिलाएँ उस समय कर को छोड़ देने से प्रसव स्वाभाविक होता है। सकती हैं। उनके अनुसार यदि गर्भवती महिलाएँ चौपाए ____ इस समय कपड़े कसकर न पहनें। टाइट कपड़े न (गाय, भैंस, बकरी) जानवरों की तरह घुटनों एवं हथेलियों पहनें। सामान्य हालातों में भी जब यह नुकसानदेह है, तो के सहारे (छोटे बच्चों की तरह) सुबह शाम जमीन पर या फिर इस समय जो गर्भवृद्धि में बाधा पड़ती है और इससे ड्राइंगरूम में 10-15 मिनिट चलें, तो उन्हें न, तो गर्भकाल बच्चे विकलांग पैदा होते हैं। गर्भस्थ शिशु जिस प्रकार में कमरदर्द होगा, और न ही कब्ज तथा गैस की शिकायत स्वच्छंद रूप से रह सकें उस ओर भी हमेशा ध्यान देना होगी, न मंदाग्नि होगी और न ही शिशुजन्म के समय चाहिए। प्रसवपीड़ा होगी। यह उनका परिवार एवं उनके अन्य गर्भवती महिलाओं के लिए चमत्कारी व्यायाम महिलाओं पर किया गया सफल प्रयोग है। हाँ, व्यायाम शहर में श्रमविहीन जीवनपद्धति में रहने वाले सभी करते समय घुटनों में रुई की पट्टी या मुलायम गदी (नी स्त्री पुरुषों को यह बात अच्छी तरह मालूम हो गई है कि कैप ) बांध लें। इस समय पर रखी गई थोड़ी-सी सावधानी स्वस्थ एवं चुस्त रहने के लिए नियमित व्यायाम आवश्यक आपके इस महत्वपूर्ण समय को और अधिक सहज करती है, किन्तु जब महिलाएँ गर्भवती हो जाती हैं तब निश्चय है। अतः, रखें थोड़ा-सा ख्याल, और पायें स्वास्थ्य का करना मुश्किल हो जाता है कि अब वे कौन-सा व्यायाम अनमोल उपहार ..... करें, कौन-सा न करें। एक बात का ध्यान रखें कि जिन कार्ड पैलेस, वर्णी कालोनी, सागर व्यायामों में पेट पर जोर आता है अथवा आगे या पीछे फोन 226877 सदलगा में पंचपरमेष्ठी विधान का आयोजन 'कल्याणोदय तीर्थ' पंचकल्याणक-पूजा-महोत्सव की द्वितीय वर्षगाँठ के मंगल अवसर पर आयोजित श्री पंचपरमेष्ठी विधान, श्री चौंसठ रिद्धि विधान, श्री शांतिनाथ विधान तथा रथयात्रा महोत्सव कार्यक्रमों का भव्य आयोजन आचार्य श्री 108 विद्यासागर मुनिराज के सद्-आशीर्वाद तथा परमपूज्य “आचार्यश्री' मुनिसंघ तथा बाल-ब्रह्मचारी विद्वानों के सानिध्य में सानन्द सम्पन्न होंगे। कार्यक्रमों में आपकी उपस्थिति बन्धु तथा मित्रों सहित आपेक्षित है। सभी कार्यक्रमों का स्थान : गुम्फा, सदलगा (समीप बस स्टैंड) अपने पधारने के पूर्व लिखित सूचना "कल्याणोदय तीर्थ" कमेटी के कार्यालय में दिनांक 31 जनवरी 2005 तक अवश्य भेजने की कृपा करें। "कल्याणोदय तीर्थ" श्री 1008 शान्तिनाथ दिगम्बर जैन अशिशय क्षेत्र, सदलगा (जिला) बेलगाम (कर्नाटक) -591239 फोन - 08338-251006 (श्री कुमार संतोष ) -दिसंबर 2004 जिनभाषित 21 www.jainelibrary.org Jain Education International For Private & Personal Use Only
SR No.524292
Book TitleJinabhashita 2004 12
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRatanchand Jain
PublisherSarvoday Jain Vidyapith Agra
Publication Year2004
Total Pages36
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Jinabhashita, & India
File Size5 MB
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