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________________ ( ३ ) मका परिचय बड़ी खोजके साथ लिखा गया हैं । मूल्य साढ़े चार आने । न्यायदीपिका - न्यायका अपूर्व ग्रंथ है । साथमें सरल भाषाटीका भी लगा दी गई है। न्याय सीखनेवालों के लिए बहुत उपयोगी है । मूल्य बारह आने । परमार्थजकड़ी संग्रह - इसमें कविवर दौलतराम, भूधरदास, रूपचंद, जिनदास, रामकृष्ण, दरिगहमल और शाद्दणू रचित वैराग्यकी १५ जकड़ियोंका संग्रह है । मूल्य डेढ़ आना । प्रवचनसार परमागम - श्री कुन्दकुन्दाचार्य के नाटकसमयसारकी कविता करके जिस तरह कविवर बनारसीदासजीने यश प्राप्त किया है, उसी प्रकार से काशीनिवासी कविवर वृंदावनजीने प्रवचनसार परमागम ( कुन्दकुन्दकृत ) की कविता करके नाम कमाया है । इसमें कवित्त सवैया आदि छन्दोंमें अध्यात्मके गूढ़तवा बड़ी सुन्दरतासे वर्णन किया है । कविवरकी खास हाथकी लिखी हुई प्रतिसे संशोधन करके यह ग्रंथ छपाया गया है । मूल्य सिर्फ सवा रुपया । प्राणप्रिय - काव्य- यह सुन्दर और सरस काव्य प्रत्येक सहृदयको पढ़ना चाहिए । भक्तामर के चौथे चरणोंकी समस्यापूर्ति की गई है और उसमें नेमिनाथ और राजीमतीका सरस चरित्र निबद्ध किया गया है। मूल्य दो आने । Jain Education International वृंदावनविलास - इस ग्रंथ में काशीनिवासी कविवर बाबू वृंदावनजीके संकटमोचन, कल्याणकल्पबुम आदि मनोहर स्तोत्रों, अनेक प्रकार के पदों, फुटकर कविताओं, जयपुरके पंडित जयचन्द्रजी, दीवान अमरचन्द्रजी आदि महाशयों के साथ किये हुए प्रश्नोत्तरों और गद्यपद्यबद्ध चिट्टियों का संग्रह है ।साथ ही हिन्दी के एक अद्वितीय पिंगल ग्रन्थका संग्रह है, जो कि छन्दशतक के नामसे प्रसिद्ध है । ग्रन्थके प्रारंभ में कोई ३२ पृष्ठों में कविवरका जीवनचरित्र और उनके ग्रन्थों का परिचय दिया है । मूल्य बारह आने । भक्तामर स्तोत्र - - अन्वय, हिन्दी अर्थ, भावार्थ और नवीन भाषापद्यानुवाद सहित । इसमें रत्नकरंडके समान पहले प्रत्येक श्लोकका अन्ययानुगत पदार्थ. लिखकर फिर प्रत्येकका भावार्थ लिखा है । पश्चात् हरिगीतिका और नरेन्द्रछन्द में उसकी सुन्दर कविता बनाई गई है। मूल्य चार आने । भक्तामर स्तोत्र - हेमराजजीकृत कविता और मूल सहित । मूल्य एक आना । भाषापूजासंग्रह - - अबकी बार इसमें जितनी पूजायें और शान्ति विसर्जन अभिषेक आदि पाठ हैं, वे केवल भाषामें ही रक्खे हैं । संस्कृत प्राकृतका कोई भी पाठ नहीं है । विशेष खूबी यह है कि, प्रत्येक स्थान में स्थापना आव्हानादिके मंत्र शुद्धतापूर्वक लिख दिये गये हैं। क्योंकि पूजाका सच्चा तब ही मिलता है, जब वह शुद्ध मंत्रोच्चारण सहित की जावे । नीचे लिखे भाषापाठ हैं- अभिषेकपाठ, पंचामृताभिषेक पाठ, देवशास्त्रगुरुपूजासमुच्चय, वीसविहरमानपूजा, देवपूजा, सरस्वतीपूजा, गुरुपूजा, कृअत्रिमचैत्यालयपूजा, सिद्धचक्रपूजा, पंचमेरुपूजा, नन्दीश्वर, सोलहकारण, दशलक्षण, रत्नत्रय और निर्वाणक्षेत्रपूजा, समुच्चय चौवीसीपूजा, स्वयंभूस्तोत्र, सप्तर्षिपूजा, शान्तिपाठ विसर्जनपाठ, स्तुतिपाठ आदि सब भाषा के पाठ हैं । मूल्य आठ आने । पंचेन्द्रिय सम्बाद - इस पुस्तक में पाँचों इन्द्रियोंने अपनी अपनी श्रेष्ठता अच्छी अच्छी युक्तियोंसे सिद्ध की है । मूल्य एक आना । बनारसीविलास- इसमें आगरानिवासीस्वर्गीय कविवर बनारसीदासजीके ज्ञानबावनी, सूक्तमुक्तावली आदि अनेक ग्रंथरत्नोंका संग्रह है । इसके प्रारंभ में ११३ पृष्ठों में ग्रंथकर्ता कविवर बनारसीदासजीका सविस्तर जीवनचरित्र भी दिया गया है। हिन्दी में इतना सच्चा और बड़ा जीवनचरित्र आजतक किसी भी कविका प्रकाशित नहीं हुआ है । मूल्य १॥ ) भूधरजैनशतक - कविवर भूधरदासजी के यों तो रुपया | रेशमी जिल्दका दो रुपया । सब ही ग्रन्थ उत्तम हैं, परन्तु इस जैनशतक में तो बालबोध जैन धर्म चौथा भाग- मूल्य पाँच उन्होंने कमाल कर दिया है । इसका एक एक कवित्त आने । सवैया अमूल्य और प्रत्येक पुरुष के कंठ करने योग्य है। विनंती संग्रह- इसमें छोटी बड़ी २४ विनतियोंका टीकाके स्थान में कठिन २ शब्दों की टिप्पणी दी हैं। ह है। मूल्य तीन आने । मूल्य ढ़ाई आने । I For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.522830
Book TitleJain Hiteshi 1917 Ank 01 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNathuram Premi
PublisherJain Granthratna Karyalay
Publication Year1917
Total Pages116
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Jain Hiteshi, & India
File Size13 MB
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