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________________ गये हैं। 'प्राकृत एवं जैनधर्म विभाग' में प्रस्तुत किये जाने वाले शोध-आलेखों का प्रमुख विषय "जैनविद्या अध्ययन के 100 वर्ष" रखा गया है। प्राकृत एवं जैनधर्म खण्ड में सम्मिलित होने वाले विद्वानों से अनुरोध है कि वे अपने शोध आलेख का विषय 'जैनविद्या अध्ययन के 100 वर्ष' से सम्बन्धित रखें और अपने आलेख की एक टंकित प्रति प्रोफेसर प्रेमसुमन जैन 29, विद्याविहार कॉलोनी, उत्तरी सुन्दरवास, उदयपुर-313001 को अवश्य भिजवा दें। इस अधिवेशन में प्रो० हीरालाल जैन (जबलपुर) के योगदान संबंधी आलेखों का भी एक सत्र आयोजित होगा। चयनित स्तरीय शोध-आलेखों के प्रकाशन की और उनके लेखकों को समुचित मानदेय प्रदान करने की भी व्यवस्था की जा रही है। -डॉ० अशोक कुमार जैन, लाडनूं (राज०) ** __ श्रीमती सरयू दफ्तरी आई०एम०सी० की नई अध्यक्ष बनीं भारती वाणिज्य एवं व्यापार-जगत् की सुप्रतिष्ठित संस्था इंडियन मर्चेट चैम्बर (I.M.C.) के सत्र 2000-2001 के लिए अध्यक्ष पद को गौरवान्वित करने हेतु सुप्रसिद्ध उद्योगपति एवं समाजसेविका श्रीमती सरयू दफ्तरी (ताई जी) को निर्विरोध रूप से सर्वसम्मति से चुना गया है। वे इसके पूर्व भी सन् 1981 ई० में इस पद को सुशोभित कर चुकी हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि वे इस प्रतिष्ठित SA संगठन की सर्वप्रथम महिला-अध्यक्ष थीं ! . सौ० सरयू दफ्तरी अपने परिचितों में 'ताई जी' के नाम से विख्यात आप एक आ६ यात्मिक, शांतिप्रिय, कर्मठ एवं जिज्ञासुवृत्ति की सात्त्विक महिलारत्न है। समस्त जैन समाज को आपके व्यक्तित्व एवं उल्लेखनीय कार्यों पर गर्व है। ____ कुन्दकुन्द भारती-परिवार एवं प्राकृतविद्या-परिवार इस सुअवसर पर आदरणीय ताई जी का हार्दिक अभिनंदन करता है तथा उनके नेतृत्व में यह संस्था अहिंसक अर्थशास्त्र के भारतीय मूल्यों को व्यवहार में लाने में समर्थ हो सके - एतदर्थ हार्दिक मंगलकामना करता -सम्पादक ** अहिंसा इन्टरनेशनल के 1999 के वार्षिक पुरस्कार प्रदत्त ___ अहिंसा इन्टरनेशनल की चयन समिति द्वारा वार्षिक पुरस्कारों (वर्ष 1999) के अन्तर्गत इस वर्ष निम्नलिखित विद्वानों एवं समाजसेवियों को सम्मानित किया गया है। 1. 'अहिंसा इन्टरनेशनल डिप्टीमल आदीश्वर लाल जैन साहित्य पुरस्कार' 31000/ डॉ० के० आर० चन्द्रा अहमदाबाद को प्राकृत साहित्य में शोध एवं संशोधन के लिये। 2. 'अहिंसा इन्टरनेशनल भगवानदास शोभालाल जैन शाकाहार पुरस्कार' 21000/ सुश्री डॉ० रचना जैन सागर को शाकाहार पर बच्चों में शाकाहार विकास' पर प्रशंसनीय लेखन के लिए दिया गया। 3. 'अहिंसा इन्टरनेशनल रघुवीरसिंह जैन जीवरक्षा पुरस्कार' 11000/- सुश्री रश्मि शर्मा प्राकृतविद्या-जनवरी-मार्च '2000 00 105
SR No.521361
Book TitlePrakrit Vidya 2000 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRajaram Jain, Sudip Jain
PublisherKundkund Bharti Trust
Publication Year2000
Total Pages120
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Prakrit Vidya, & India
File Size14 MB
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