________________
काव्यानुवादः
IE
CHOENACETONES
Jain Education International 2010_04
दुनिया
गुर्जरभाषायां मूललेखक: गुणवंत शाह
ईजिप्तना पिरामिडमां
चार-पांच हजार वर्षोथी
ठावकाईथी पडी रहे
एक ममी
ओचितुं जागी युं
अने
पिरामिडनी बहार
लटार मारवा नीकळी पड्यु.
थोडी ज वारमां
आम तेम फरीने ए पाएं आयु
अने यथास्थाने गोठवाई गयुं, सूई जतां पलां
एक निसासो नाखी ए बोल्युं : दुनिया हवे पहेलांना जेवी रही नथी!
५६
For Private & Personal Use Only
www.jainelibrary.org