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अनुसन्धान-७७
रोग जरा घट जा नहीं तां आदरि धर्म सुद्ध इंद्री पडस्यइं बलहीणां रहस्यइ जीव अबुध... सो... २३ अहवी अमृत देसना दीधी पर उपगार सतीइ अकमना सुणी आतमहित सुखकार... सो... कर जोडी ऊभी थई दुई प्रभु संयम भार ओ संसार बीहामणो हूं छोडिसि निरधार... सो... वलतुं अम कहई यती अवसर तुझ नही आज भोगकर्म घणो ताहरइ पामिस घण रिधि तु साज... सो... २६ चारित्र लेई खंडतां पाप असंख बंधाई चउगति माहि रडवडई दुर्नवा(दुर्नठी?) प्राणी थाइं... सो...२७ तिण कारण हिवणां नहीं दीक्षारउ प्रस्ताव ईम सांभली अंजना सती बइठी निश्चल भाव... सो... २८ त्रीजइ खंडई ओ कही पहिली ढाल रसाल कवि कहइ जे सूधा जती वंदण तासु त्रिकाल सो...
दूहा विनय करी पूछइ यती भगवन करो प्रसाद कर्म फलाफल दाखवो टालो मन विखवाद... तुं समरथ मोटो जती जिनशासन सिंणगार विमल कमाई ताहरी शिव मंदर दातार... दोस पखई हूं ईण भवि पाम्या कष्ट अघोर पव्व भवंतर मई किस्यां कीधा कर्म कठोर... सुणि सुंदरि जंपय जती तुझ पूव्व अवतार ज्ञान प्रमाणई हू कहूं वीतक सघली वात...
ढाल - राग - कालहरउ
सांभली रे सामलीया सामी... ए देशी पूरवभव गुरु ज्ञानी बोलई सांभलि सत्य सोभागणि नारी पृथवीभूषणनगर निरोपम राज करई नामई जयसार...
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