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अनुसन्धान-७६
ढाल : पावस रित पीयारी हो, ने०
सेज अमारुं हो फूलडे अति सही हेडि मुंको हीयारी हो, ने०
वरग मोटाना हो वहिजै चित्त चही ॥१५॥ दूहा : चिहूं दिस सीत चमकीयो, आयो आगणमास
चाहुं चंद चकोर जयुं, अंगन पूरो आस ॥१६।। ढाल : परपीडा पीछांण हो, ने०
वडपणि जगमै ते खरो अग्वड(ह?)ण चिंत म आंण हो, ने०
गरज्यौ होवै हो जेहनो गुण करे ॥१७॥ दूहा : घट रूपी घरमै वसो, सज्जन सुगुण सदैव
अस पडै जाडा पोसमै, पंथ निहालु पीव ॥१८॥ ढाल : मुझ नैठ मधी छै जाया हो, ने०
सा लगै नही हो मंदिर ओकली कंपै कोमल काया हो, ने०
वोल्यो तसु हावै हो केहनो हृदय वली ॥१९॥ दूहा : माहै अंबा मोरीया, वल्लभ आवि वसंत
अबीर गुलाल अरग जै, राजवी फाग रमंत ॥२०॥ ढाल : दिन ओ नणंदीना वीरा हो, ने०
सास विचलै हो नित पुत्त सांभरै पंजर ऊपजत पीर हो, ने०
मंग तुमारो हो मेल्यां किम सरै ॥२१॥ दूहा : फागुण वाये फगफगे, फूल्या बहूत पलास
होली खेलण हुँस छै, अविधारो अरदास ॥२२॥ ढाल : यौवन जोरै आयो हो, ने०
दोई न्यारा हो नाठा किम रहो यादवकुल थे आव्या हो, ने० दोषी रे भरमावै हो वाले भमति दहो ॥२३॥