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________________ ४२ अनुसन्धान-७६ श्रीशंखेश्वरपार्श्वनाथाय नमः ।। ॥ ढाल - शासनदेवीय पाय पणमेविय गाइसू रिषभ वीवाहलो ए - ए देशी ॥ सकल मंगल तणां नंदनवन घणां, सींचवा पुष्कर-जलधरू ए, पास चिन्तामणी कामित-सुरमणि, पूरवा भविजन जयकरू ए, पास जख्य जेहनो शांम नि शुभमनो, परताय पूरण परगडो ए, देव धरणिंद पदमावती जस पदि, सेव सारइ चितें परवडो ए त्रूटक अति वडा परता भुवनमांहि ठाम ठामइं दीपता, तेहना चरण-सरोज प्रणमी कर्म सविनइं जीपता, दीपतुं शासन वलीय जेहनुं वर्धमान जिणंदमुं, जागतुं तेहनुं दूसम मांहिं तेज जिम दिणंद- १ जेहनु उत्तम गौतम गोत्र छइं इंद्रभूति ज वडा गणधरू ए, सोहमसामि छई पंचम गणधर पाटि थापइ तस जयकरू ए, निग्रंथ बिरुद आठ पाट लगइं ते चल्युं कौटिक बिरुद नवम सूरिजी ए, चंद्रगच्छ बिरुद थयुं पनरमी पाटिथी प्रगटिउं चंद्रसूरि थकी ए. बेटक सोलमइं पार्टि बिरुद बीजु पणि कयुं वनवासथी, पांत्रीस पाटि लगइं तेह चाल्युं पूर्ण प्रवचनवासथी, वडगछ नामइ बिरुद छठं कर्तुं त्रेतालीस पट लगई, महाराज-राज-राणइ बिरुद दीधुं महा-तपा इति सहु वगई २ ॥ ढाल || राग - गोडी ॥ जंबूद्वीप मझारि - ए देशी ॥ चिमालीसमई पाटि, जगतचंद्रसूरीसर, तपा बिरुद जिणें धारीउं ए १ संवत बारने मानि, वरस पंचासीइ (१२८५), तिहांथी जगी जस विस्तर्यो ए २ पंचांगी अनुसारि, किरियां साचवइं, - थाप उथाप न जेहनइं ए ३
SR No.520578
Book TitleAnusandhan 2019 01 SrNo 76
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShilchandrasuri
PublisherKalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad
Publication Year2019
Total Pages156
LanguageSanskrit, Prakrit
ClassificationMagazine, India_Anusandhan, & India
File Size9 MB
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