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________________ ३६ अनुसन्धान-७६ १४. पार्श्वनाथस्तुति श्रीपार्श्वनाथं प्रणमामि देवं, देवासुरैर्वन्दितपादपद्मम् । पद्मावती-कल्पित-निर्विकल्पं, कल्पद्रुमाभं धरणेन्द्रपूज्यम् ॥१॥ ये प्रातिहार्य-कलिता कलि-ताप-मुक्ता, मुक्ताफलोज्ज्वल-यशः-परिपूरिताशा । मुक्ति प्रति प्रतिभवं भवनाधिनाशा, नासामितानहमहं दशमेव सिद्धयम् (?) ॥२॥ त्रिपदिवदतिबीजो मूलसिद्धान्तमूलो, गणधरमि(म)तिसंस्थिस्कन्धबन्धोपमागः ।। विटपिवदनयोगः पत्रपुष्पप्रकीर्णः, शिवसुखफलदः स्यात् श्रीश्रुतज्ञानवृक्षः ॥३॥ क्षुद्रोपद्रवरोगशोगहरिणी दारिद्रविद्राविणी, नागव्यग्रकरा फणत्रयधरा देहप्रभाभास्वरा । पातालाधिपतिप्रिया प्रणयनी चिन्तामणी देहिनां, श्रीमत्पार्श्वजिनेशशासनसुरी पद्मावती पातु वः ॥ ॥ इति श्रीपार्श्वनाथस्तुति ॥ (ला.द. विद्यामन्दिर - १६१५२) १५. श्रीजिनसुखसूरि-रचित गोडी-पार्श्वनाथ-स्तवन ॥ ढाल - लुंगी ल्याज्यो रे अहनी ॥ गुण गाज्यो रे, गुण गाज्यो रे... गोडीपुर-नायक लायक जिन-गुण गाज्यो रे... १ वामाजी हो नंदन वंदन नेह लगाज्यो रे... २ केसर कर धराय कचोलकि अंग रचाज्यो रे... ३
SR No.520578
Book TitleAnusandhan 2019 01 SrNo 76
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShilchandrasuri
PublisherKalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad
Publication Year2019
Total Pages156
LanguageSanskrit, Prakrit
ClassificationMagazine, India_Anusandhan, & India
File Size9 MB
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