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________________ ११६ अनुसन्धान-७६ नवरंगा चंगी नेत्र कुरींगी सहिजि अति सुकुमाल, हवइं सांभलउ सतीनइ माथइ पडइ अचिंतु जाल ||४|| ॥ ढाल ॥ गिरिवर्दन नगरि वसइ रे समुद्रह पेलि पारि, तिहांनउ राय यात्रा भणी रे आवउ पाटेणि मज्झारि । जीवतस्वामि जुहारइ रे नरनाथ जोडी हाथि, पूजी अरथी(ची) गुण थवइ रे, रूअडला श्रीआदिनाथ ॥५॥ आदिनाथ पूजीनइ राजा जोइ नगर निहाली, सपतभूमि मंदिरइ च्छाजा कोरणीआली जाली । हेमकलस झलकंता मंदिर रंगि राजा जोइ, गुखि बइठी कमला दीठी कस्त्र(कन?)ओइ पउमे(?) अपछर वोइ ॥६॥ आकुल व्याकुल रा हूउ रे देखी असंभम रूप, कामंध नइ गहिलु हूउ रे घरि गयु आपणि भूप । राई मनि आपणइ रे चीतवइ पाप अपार, ओ नारी कलत्रिह करु रे ताणी आणि सुरि (सारि) ॥७॥ आणी ताणी म करिसि प्राणी छती भलामइ जाणी, आकरसी विद्याइ सूती राणी आपणी शाणी बो[ल]इ वाणी म करसि प्रा[णी] मझनं सुखडी पाणी, स(सी)ल न खत खडउं जासिइ प्राणी पीलसि घाली घाणी ॥८॥ ॥ ढाळ ॥ भामिनि भणइ भोला प्राणीआ रे विषयनी सु(ध) छोडि सुख अनंता प्रा(पा)मीआ रे भोगि भमिउ भव कोडि रे राजा नही जीवइ त्रिणि पंचास, थोडउ जीवी घणउ साधइ रे जिम छूटइ गर्भवास रे राजा० ॥९॥ जीव सुतु सुहूणा माइहे रे, देखइ वसु अनेक । जाग्या पछी काइ तं(न)ही रे सुहूणा माहिक रे राजा० ॥१०॥ सर्व संसार सुहूण ससु(मु) रे पुत्र कलत्र परिवार ।। दिन वाकेइ वाल्हा विडइसि के सवि मूकी देह कीजइ छार रे राजा० ॥११॥
SR No.520578
Book TitleAnusandhan 2019 01 SrNo 76
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShilchandrasuri
PublisherKalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad
Publication Year2019
Total Pages156
LanguageSanskrit, Prakrit
ClassificationMagazine, India_Anusandhan, & India
File Size9 MB
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