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जान्युआरी - २०१८
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योग वही पंडितपद पामइ, सोल सित्तरिइं जेह रे, श्रीविजयसेनसूरीश्वर हाथि, कनकविजय गुणगेह रे
__थासइ भट्टारक एह १२७ ध्यन २ ए सुद्ध... श्रीविजयदेवसूरीश्वर थापइ, वाचकपद उच्छाहिं रे, त्रिहोतरिइ श्रीपत्तन नगरिइं, श्राविका लालीनी प्रतिष्टाई रे १२८
ध्यन ध्यन ए सुद्ध... विनयवंतं रंजई गुरुनु मन, गौतम परिहिं वजीर रे, अंग उपांग सहू भणइ भणावइ, गुणवंत साहसधीर रे १२९
ध्यन ध्यन ए सुद्ध... ॥ ढाल - दसमी ॥ १० राग - सिंधुओ मिश्र ॥ चेतन चेतन प्राणीआ ए देशी ॥ सहिर सषर सही साबली. जिहां जैननं राज, महा महोत्सवे पधारिआ, तपगच्छ गुरुराज
सहिर...[आंकणी] विमलमंत्रीश्वर सम सही, रत्नसीह सही रत्न, पुण्यवंत पुत्रह पदमसी, जिहां घरि जीवह यत्न १३१ सहिर... श्रीगुरुनई करइ वीनती, निज मननइ उल्हासि, ध्यान करु गुरुजी ईहां, पूरु श्रीसंघ-आस १३२ सहिर... विधि सहू साचवस्यूं अम्हे, पलस्यइ सुद्ध अमारि, जो मांनी गुरे विनती, हरख्या सहू नरनारि १३३ सहिर... सोल अठ्योतरइ सुदि छछि, गुरु बइठा ध्यान, मौनपणइ एकांत तिहां, युगतइं युगह-प्रधान १३४ सहिर... चउथ अठमनइ छठस्यूं, आंबिल ऊजल अन्न, नही प्रमाद निद्रा नहीं, गुण चूसूट्ठि मन्न १३५ सहिर... सूरिमंत्र सूधु जपइ, पदमासनि जेह, कारजि ते लिखवइ करी, जणावइ सहू तेह १३६ संघ चतुरविध तिहां करइ, अठम छठ उपवास, आंबिल तप उच्छाहस्यूं, जेहथी पूगइ आस १३७ सहिर....