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________________ मार्च - २०१६ ६० महापूर कुमरी ते तरी, श्रीवाहरि तिण साची करी; नदी मांहिथीं काढी तेउ, जीवती ते लीधी बेड... ५७ राजा चिंतइ मनमहि इंसुं, सूर रुप आव्यो ओ किसुं जिणें अकलां कंटक निरजणी, वली वात ओ कीधी घणी... ५८ राइ पूछी ततखिण नारि, किम ताणी तुमे पूर मझारि; दोय सरीखी रूपि रुवडी, नवि परणी वइ जुयलडी ... ५९ श्री भणइ निसुणो वृतंत, दसरथ नयर अमाहरुं हुंत; छइ नंदीदास विवहारी तेह, अम्ह पितानुं नाम ज अह... पापबुध ते तिहां छइ राय, तिण मांड्यो मोटो अन्याय; को परदेसी नारी च्यारि (र), वलि आवी ते नयर मझार... ६१ पापबुध ते राये धरी, च्यारे नारि लीधी अपहरी, लेइ अंतेवरमाहि पहूत, हाहाकार थयुं तिहां बहुत... ६२ `तिहां महाजन छोडावा गयुं, तउ राजा साम्हो कोपीयुं, रूडी सीख दीयइ तसु जेह, साम्हा अन्याई कीजइ तेह... ६३ तउ महाजन बुध बहु धरी, अवर नगर अधुवारुं करी, माणस सवे वस्तु लेई गया, आपण पईउडा घर रह्या.... अम्हो अम्ह तात वउलावी जाम, भाई साथि आव्यो ताम, रथ बइसारी चाल्यो वीर, पुहुता श्रीपुर नयर गंभीर... ६५ नदी उपकंठ अम्हो ऊतरी, जमवा तणी सजाई करी, कांठ मूकी गयो अम्ह भाय, अन्नह कारण नयरेमांहि... ६६ आवी तव नय-जल-पूर, लोक सवे नासी गया दूर, रथ सहित अम्हे जले आफलुं, आज सही मनवंछित फलुं... ६७ इणि पुरुषें अम्ह कीधी सार, अम्हनई भवभव अह भरतार, पूरव पुन्य करी से मिल्यो, भाग आंब अम्ह हृदय फल्यो.... ६४ ६८ ॥ वस्तु छन्द ॥ मनह मझारि सार जमाई पामीयो सोहइ पूरव भव करी पुनि आज अम्ह राय चितइ राय चिंत सत रूप तणों तेज ६३
SR No.520570
Book TitleAnusandhan 2016 05 SrNo 69
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShilchandrasuri
PublisherKalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad
Publication Year2016
Total Pages198
LanguageSanskrit, Prakrit
ClassificationMagazine, India_Anusandhan, & India
File Size12 MB
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