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________________ ११० अनुसन्धान-६९ दोहा - नेत्र सुन्य पुनि रुपजू, श्री गुरु दास करै, चरचा सुनि माहाराजकी, भव दुख दूर हरै... ११७ (सूरदास अवा रूपजी श्री गुरुना दर्शन करीने, महाराजनी चर्चा सांभळीने भवदुःख दूर करनारा छे.) श्री हजूर के पधारणे को दोहा दासनकी अरदास मुनि, करि हो क्रिपा-महर, स्वामी श्री गुरुदेवजी, पांवन करो सहर... १/११८ (आ दासनी अरज सांभळीने कृपा करशो, अने स्वामी श्री गुरुदेवजी अमारा शहेरने पावन करशो.) दिसा आदि काली अंत हु, चितवो परम-क्रिपाल, अमरावसिंहकी बीनती, पांवन करो दयाल... २/११९ (दश दिशा, आदि ओक, काळ त्रण, अंत शून्य, (आ अंकोनुं रहस्य ?) परम कृपाळुनु चिंतन करीने अमरावसिंह विनंति करे छे के अमने पावन करशो.) बतीसांमैं धुर अखिर, ता आगैं सत बीस, पांण सहत ईकबीसमौं, रखीयो बिसबाबीस... ३/१२० । (आरंभमां बत्रीश, ओ पछी सत्यावीश, एकवीशमो पाण साथे, साधांकी अरज - दोहा - साध बसत है आपके, राम द्वारै तांहि. तिनकै निति प्रति रहत है, ध्यान आपको मांहि... १/१२१ (साधुओनी अरज - आपना रामद्वारे वसनारा साधुजनो जेमनुं ध्यान नित्य आपना प्रत्ये ज रहे छे.) चोपाई - रामप्रसाद दासनको दासा, तुम दरसण की करि है आसा, क्रिपा करके दरसण देवो, बार बार बिनती मुनि-लेवो... २/१२२
SR No.520570
Book TitleAnusandhan 2016 05 SrNo 69
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShilchandrasuri
PublisherKalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad
Publication Year2016
Total Pages198
LanguageSanskrit, Prakrit
ClassificationMagazine, India_Anusandhan, & India
File Size12 MB
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