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(२२) चाणस्मा-श्रीविजयजिनेन्द्रसूरिजीने उद्देशीने घाणेरावनो विज्ञप्तिपत्र (सचित्र)
अनुसन्धान- ६४
- सं. मुनि सुयशचन्द्र - सुजसचन्द्रविजय
पत्रादिमां मङ्गलाचरण रूपे संस्कृत तथा गुर्जर भाषाना पद्योमां पञ्चजिनेश्वरोने वन्दना करी कविए प्रथम ढाळमां गुर्जरदेशनुं तेमज बीजी ढाळमां चाणस्मापुरनुं सुन्दर वर्णन कर्तुं छे. पत्र चाणस्मापुरमा बिराजमान विजयजिनेन्द्रसूरिजीने उद्देशीने लखायो होइ त्यारपछीना दूहाओमां तथा 'ईडर आंबा...' ए देशीमां सूरिजीना ३६ गुणोनुं वर्णन कविए आलेख्युं छे. पूज्य श्रीना आभ्यन्तर गुणोने 'आधी तलाई...' ए देशीमां रजू करी फरी तेवा ज गुणोने कुंडलीया छप्पयमां आलेख्या छे. सूरिजीना विशिष्ट गुणोने संस्कृत भाषामां स्तवना करी कविए पछी मरुधर देशना घांणेरा नगरनुं वर्णन प्रारम्भ्युं छे. हाटक, गझल, पद्धडीछन्दमां अनुक्रमे नगरनुं, राजानुं, राज्य-व्यवस्थानुं, जैन- जैनेतर मन्दिरोनुं, तळाव, वाव तथा अन्य पण स्थापत्योनुं तेमज व्यापार, लोकव्यवस्था विगेरेनुं सुन्दर चित्रण रजू कर्तुं छे. घांणेराना इतिहासनी केटलीय कडीयोने कविए पत्रना माध्यमे अहीं रजू करी छे. बीजा केटलाक जेवा के सुभट वर्णननां पद्यो, तळावना वर्णननां पद्यो (छप्पय), नारीवर्णननां पद्यो, पोसालवर्णननां विगेरे पद्यो कविनी उत्तम कवित्वशक्तिना नमूना कही शकाय * सूरिजीना निश्रावर्ति मुनिराजोने पोतानी वन्दना जणावी पोताना सहवर्ति मुनिवृन्दनी वन्दना निवेदित करी छे. श्रीसङ्घना क्षेमकुशल जणावी पूज्य श्रीनी स्वास्थ्यनी सुखशाता - पृच्छापूर्वक चातुर्मासनी विनन्तिनुं वर्णन त्यारपछीना दोहामां कविए कर्तुं छे. हंजा मारू... ए ढालमां सूरिजीना दर्शननुं देशनानुं तेमज श्रीसङ्घमां पधारता थनारां अनुष्ठानोनुं वर्णन करी कवि मिलननी उत्कण्ठानुं वर्णन करे छे. अहींथी आ पत्र अपूर्ण रहे छे, छतां प्राप्त पत्रोमां आ पत्र सौथी मोटो छे.
★ गद्यबद्ध पत्ररचनामां तत्कालीन व्यवहारबोलीना शब्दो प्रचुर मात्रामां वपराया होई तेटलो भाग समजवो वधु क्लिष्ट छे.
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