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जान्युआरी-2007
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लखचोरासि हो अवतरण छोडि, पू० ॥९॥ सितरसो ठाणा बोल जोईने ललना,
देवेंद्रसूरि हो चरित अविलोय, क० । आवश्यक वृत्ति अनुसारथी ललना,
मि गुंथ्या हो बोल निरबुद्धि होय, पू० ॥१०॥ एहमा ओछु अधिकुं कडं ललना,
विचारी हो शुद्ध करयो विद्वान, क० । श्रीश्रेयांश शासन प्रतपयो ललना,
___ मंदिरगिरि हो वली गगनें भाण, पू० ॥११॥ पंडित चतुरसागर गुरु शोभता ललना,
तस शिशु हो लालसागर विनित, क० । तस पदकमल ..... ..... सम ललना,
विशेष कहे हो..... पू० ॥१२॥ वेदांक संयम संवते ललना,
आसो सित हो दशमी रहिय चोमास, क० । आडीसरना संघनी ललना,
श्रीवत्सादेवी हो तुम पुरेयो आस, पू० ॥१३॥
॥ कलश ॥ इम थुण्यो जिनवर भक्ति निर्भर एकादशम अरिहंत ए ।
आडिसर मंडण भयविहंडण सिधरंजन भगवंत ए ॥ तस(प) गच्छनायक सुमतिदायक श्रीविजयक्षेमसूरीस ए ।
तस पट्ट प्रभकर तेज दिनकर श्रीविजयदयासूरि ईश ए ॥१॥ तस गच्छ राजें अतिसकानें श्रीकूशलसागर वाचकवरो ।
तस शिस पंडित सगुण मंडित उत्तमसागर श्रुतधरो ॥ . तस चरण सेव बुद्धि चतुर गुण निधि तस शिश पंडित लाल ए। तस शिश एम विशेष जंपें प्रभु गुण भणे ते मंगल माल ए ॥२॥
॥सर्वगाथा - १०१ ॥ ॥ इति श्रेयांश जिनस्तवन समाप्त ॥
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