________________ नाणेण जाणई भावे, दंसणेण य सद्दहे। चरित्तेण निगिण्हाइ, तवेण परिसुज्झई।।६२।। नादंसणिस्स नाणं, नाणेण विणा न हुंति चरणगुणा। अगुणिस्स नत्थि मोक्खो, नत्थि अमोक्खस्स निव्वाणं / / 63 / / हयं नाणं कियाहीणं, हया अण्णाणओ किया। पासंतो पंगुलो दड्डो, धावमाणो य अंधओ।।६४।। संजोअसिद्धीइ फलं वयंति, न हु एगचक्केण रहो पयाइ। अंधो य पंगु य वणे समिच्चा, ते संपडत्ता नगरं पविट्ठा।।६५।। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org