________________ जीवन की भव्यता : अभी और यहीं MINALS लेकिन उस पर इतनी ज्यादा देर खड़े मत रहना कि फिर वहां घर जाना। तब सब किनारे खो जाते हैं। 'यो वै भूमा. तत्सख'-और तब है सख विराट में। 'नाल्पे सुखमस्ति'-लघु में सुख कहां! 'भूमैव सुख'-उस भूमा में ही सुख है। उस भूमा की ही हम जिज्ञासा करें, उस भूमा को ही हम खोजें! वह भूमा हममें छुपा है। वह स्वतंत्रता हमारा स्वभाव है। आज इतना ही। 509 Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrarorg