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________________ गणितकेफोर्मुलोयाकिसीभीशब्दावलीसेपूर्णसत्यऔरप्रकृतिकेवास्तविकअस्तित्वकोपूर्णरूपसेनहींसमझस कताहै|दुसरेप्रमेयकेअनुसारकोईभीवैज्ञानिकसिद्धांतअपनेआपमें पूर्णरूपसेसुसंगत(selfconsistent)नहींहोस कताहै विज्ञानकेसिद्धांतोकीइन्हीकमियोंकेकारणवैज्ञानिकगोडेलकोआत्माकेसिद्धांतकीजरुरतपड़ी|विज्ञानमें आत्माकेविचारकोशामिलकरनेकीजरुरतकईअन्यवैज्ञानिकोनेभीमहसूसकीहैजिनमेप्रसिद्धवैज्ञानिकआइज कएसिमोव,इपीविगनर,बीडीजोसेफसन,इल्याप्रिगोजिन,रोजरपेनरोसऔरइसीजीसुदर्शनभीशामिलहै। तोहमनेदेखाकिआजकिसतरहविज्ञानमेंआत्माजैसीएकसंज्ञाकीजरुरतहै।परआत्माकेविचारकीजितनीचर्चा औरव्याख्याएभारतीयदर्शनमेंउपलब्धहैउतनीकिसीभीदर्शनमेंनहींहै।लगभगसभीभारतीयदर्शनोंमेंआत्माको किसीभीजीवकामूलमानागयाहैतथासभीदर्शनमानतेहैकिज्ञानआत्माकासबसेबड़ागुणहै।जैनदर्शनकेअनुसार आत्माकेज्ञानकेपांचप्रकारहोतेहै,जैसेकि(१)मतिज्ञान,(२)श्रुतज्ञान,(३)अवधिज्ञान,(४)मनपर्यायज्ञानऔर(५) केवलज्ञान विज्ञानमेंअभीअवधिज्ञानऔरमनपर्यायज्ञानपरकाफीशोधेहुईहैपरसभीविरोधाभासोसेभरीहुईहै। यानिविज्ञाननेअभीतकअवधिज्ञानऔरमनपर्यायज्ञानकोकोईमान्यतानहींदीहै।परइससबचर्चासेएकबाततो बिलकुलस्पष्टहैकीआत्माकाज्ञानसबसेबड़ाज्ञानकास्त्रोतहैतथापूराभोतिकविज्ञानइसआत्माकेज्ञानकाएक छोटासाहिस्साहै। सुरेन्द्रसिंहपोखरणा,भूतपूर्ववैज्ञानिक(भारतीयअंतरिक्षअनुसन्धानसंगठन)M.9825646519
SR No.269188
Book TitleVigyan ke Gyan ki Sima aur Atma ke Anant Gyan ka Mahattva
Original Sutra AuthorN/A
AuthorSurendra Singh Pokharna
PublisherSurendra Singh Pokharna
Publication Year
Total Pages4
LanguageHindi
ClassificationArticle
File Size88 KB
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