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________________ एमां बे वात छे हसु याज्ञिक ईस्वीसन १९६७-६८नुं संभवतः ए वर्ष हतुं. हुं त्यारे रहेतो हतो जैन मर्चन्ट पासे ऋषभदेव सोसायटीमां. सवारना अगीआरेक वाग्या हता ने मुंबईनी मीठीबाई कोलेजना आचार्य अने कौटुंबिक संबंधे मारा काका श्री अमृतलाल याज्ञिक आवी चड्या ने आवतां का : तारे घरे ज्ञाननी गंगा लाव्यो छु हसु !' । __ में जोयुं तो एमनी साथे अत्यंत गौर अने ताम्रवर्णा सोहामणा सज्जन ! एकदम श्वेत, इस्त्रीबद्ध, आर करेलो पहेरवेश. अमुकाका बोल्या : 'आ मारा मित्र डॉ. हरिवल्लभ भायाणी. खास आव्यो छु हुं एमने तने सोंपवा माटे !' अने भायाणी साहेबने उद्देशीने का : 'आ मारो भत्रीजो तमने सोंपुं छु भायाणी !' में स्वीकार्यो...' भायाणीसाहेब एमना लाक्षणिक हास्य साथे बोल्या। मारा आनंद-आश्चर्यनो पार न हतो. में त्यारे 'वाग्व्यापार' अने कथासाहित्य परना डो. भायाणीना लेखो वांचेला. आवा मोटा विद्वान मारे घरे ? ने एमना विद्यार्थी तरीके स्वीकारे ? मारे माटे तो दोडबुं हतुं ने ढाळ मळ्यो ! बगासुं खातां पतासुं मळ्यु. ___ हकीकत एम हती मारी बदली वीसनगरथी अमदावाद थयेली, अने अमदावादमां मने गोठ्युं न हतुं, ए बाबत अमृतलाल याज्ञिकने लखेलं त्यारे जवाबमां लखेलुं : तारी कारकिर्दी माटे अमदावाद अने गुजरात कोलेज तारा हितमा छे. त्यांनां ग्रन्थालयो, विद्वानो अने वातावरणनो लाभ मळशे. पीएच.डी. करी लेवू. उत्तमगुरुनी व्यवस्था हुं गोठवीश..... ए आटलुं झडपी ने आटलुं उत्तम थशे, एनी मने तो धारणा पण केम होय ? घरे तो बीजी ज वातो थई. प्रिन्सिपल प्रेमशंकर भट्ट पण आव्या. भावनगर शामलदास कॉलेजना त्रणे मित्रो-भायाणी, याज्ञिक अने फोझदार (प्रि. प्रेमशंकर भट्टना पिताश्री फोझदार होवाथी आ मित्रो भट्टसाहेबने Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.229726
Book TitleEma Be Vat Che
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHasu Yagnik
PublisherZZ_Anusandhan
Publication Year
Total Pages16
LanguageHindi
ClassificationArticle & 0_not_categorized
File Size421 KB
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