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________________ 100 करवाथी ख्याल आव्यो के छंद-व्याकरण अने काव्यसर्जननु, प्रस्तुतिकरण, शिक्षण आपवानी एक उज्जवळ परंपरा हती एनो पण निर्देश इतिहासमां थवो जोईए. (१५) मध्यकालीन समाज संरचनामां वहीवंचा-बारोटर्नु बहु मोटुं स्थान हतुं. आ वहीवंचा बारोटनी वहीओ मात्र वंशावळीओ ज नथी. एमां तत्कालीन सामाजिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, राजकीय विगतो पण स्थान पामती. समाजमां बनता विविध बनावोनो पण एमां समावेश थतो. प्रसंगोपात्त कवित के दोहरा-चोपाई छंदबंधमां पदाकृतिओ पण एमना द्वारा रचाती. तेओ अभिव्यक्तिना संदर्भमां सांकेतिक भाषाने प्रयोजता. पोतानी आगवी बोलीना कोश पण मळे छे. आ संकेतने (कोडने) आधारे सामग्रीने डिकोडिंग करीने, समजावीने एनो मध्यकालीन साहित्यना इतिहासलेखनमा समावेश थवो जोईए. मध्यकालीन गुजराती साहित्यना इतिहासलेखननी हस्तप्रत परंपराना संदर्भमां ज्यारे विचारणा थती होय त्यारे एमां प्राचीन भारतीय कथासाहित्यनी पूर्वपरंपरानो अभ्यास-संदर्भ नजर समक्ष होवो जोईए. आगम कथानको, जातक कथानकोनो पण ख्याल होवो जोईए. तत्कालीन सामाजिक विगतोने अभिव्यक्ति अर्पवा, प्रश्नोने छणतो सर्जक घणी वखत प्राचीन कथानकोने खपमां लेतो होय छे. क्वचित दृष्टांत तरीके पण प्रयोजतो होय छे. राजकीय इतिहासनी विगतो पण आवा कारणे इतिहासलेखक समक्ष होवी अनिवार्य जणाय छे. हस्तप्रत परंपरानो संदर्भ लईने मध्यकालीन गुजराती इतिहासलेखन माटे दृष्टि समक्ष राखवाना केटलाक मुद्दाओ अहीं नोंध्या छे. आ तो एक आदर्श माळखुं छे. एमां अभिव्यक्तिना स्वरूपनो - लेखननो पण विगते विचार करवो बाको छे. तथ्यमूलक चरित्रात्मक विगतो अने समयनिर्देश तो होय पण अहीं कृतिनुं विवेचन-मूल्यांकन के मात्र परिचय ज मूकवो ? ए एक मोटो प्रश्न छे. मात्र अभिधाना स्तरे इतिहासलेखन करीने विगतोथी Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.229704
Book TitleMadhyakalin Gujarati Sahityana Itihas Lekhannu Swarup
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBalwant Jani
PublisherZZ_Anusandhan
Publication Year
Total Pages11
LanguageHindi
ClassificationArticle & 0_not_categorized
File Size349 KB
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