SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 5
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ॥२४॥ ॥२८॥ जिम दीवहं धुरि जंबूनामि, तिम गणहर-धुरि गोयम सामि ॥२३॥ बीजी पोरिसि बइसी, जिणवर-पयठाणी । गोयम करइ वखाणू, अमृतोपम वाणी जिम जिम मुणिवर तत्तु पयासइ, संखातीत भवंतर भासइ । तिम तिम लोयहं मनु इम डोलइ, इहु छदमत्थु कि केवलि बोलइ ॥२५॥ सुयकेवलि भगवंतो, सो साहु मुणेई । तहवि जिणेसर वयणू, आदरि निसुणेई ॥२६॥ जाणंतेवि ण गणहरराय, वीर जिणेसर आगलि थाय । परहित-हेतु जि पृच्छा कीधी, गोतमपृच्छा ते सि(सु)प्रसिद्धी ॥२७॥ मुनिपति अति-अप्रमत्तो, छट्ठि तपु पारइ । बहुविह लबधिसमिद्धो, जगि जसु विसथारइ गुपिहिं न गोयम को तुडि पावइ, पुण मुझ मनि एहु कउतिगु भावइ । इसी भगति जिणवर जु वहेइ, सो जि किम केवल न लहेई ॥२९॥ सालपमुह जे सीस, देषी सुणी राए । ते सवि केवल(लि) हूवा, गोयम सुपसाए चंपापुरि जिणवर पणमेवी, सीसहं केवलनाणि मुणेवी ।। गोयमु चिंतइ किसउ विनाणू, एकु जि हडं न लहउं वरनाणू ॥३१॥ वस्तुः चरमजिणवर चरमजिणवर पढमवरसीसु निसिदीस जिणपयकमला-रायहंससम सरिसु सोहइ । सुहज्झाण-सुयनाण-गुणि अमियवाणि जणचित्त मोहइ ॥ जे जे दिखइ सीस तर्हि, पावइ केवलनाणु । [ब]पुरे ! गोयमगुरु सकति, अणहूंतउ दे दाणु ॥३२॥ त्रितीय भाषा ॥ जो नियसकति प्रमाणू ए अष्टापद तीरथ नामू ए । सो नस... [के]वलनाणू ए. निच्छइ होस्यइ एणि भवे इसउ अरथु वखाणी ए, देसण करि जं रहिय जिणु । सुरहं वयण तं जाणी ए, गोय[म]...त कंठि...ए अष्टापदि तिणि ताली ए, क्रमि क्रमि त्रिहुं पावडिय लगे । ॥३०॥ ||३३|| ||३४|| [60] Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.229544
Book TitleGautamswami Ras Parichayatmaka Bhumika
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShilchandrasuri
PublisherZZ_Anusandhan
Publication Year
Total Pages12
LanguageHindi
ClassificationArticle & 0_not_categorized
File Size333 KB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy