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________________ 108 July-2002 ___ "संवत् 1902 वर्षे तपागच्छे भ. श्रीविजयधनेस्वरसृरीराज्ये पं. दीपविजयकविराजेन पूर्वपरंपरागत उद्धरित वसुधारा मंडल 1 वसुधारादेवी चित्र 2 वसुधाराविधान 3. श्रीगुजरातदेस चडोत्तर मध्यभागे / श्रीवसोग्रामे / भक्तजनकारापित महान देवल / तन्मध्यनिवासीनी सकल जनइच्छित पूरनी वसुधारादेवी चित्रं / श्रेयः / हिरण्यसुवर्णवृष्टिवरसनी सुचंद्रगृहपतीसंकटउद्धरनी देवी चित्रं / श्रेयः / मंडलविधान पुस्तकसे करना / " ___ आ प्रमाणभूत लखाण एटलुं स्पष्ट छ के वसुंधरा एटले पृथ्वी-एवी कल्पना निराधार ठर के. __ पादटीपो : 1. पूर्णिमा पाण्डे, वसुधारा: वेद से लोक तक की यात्रा. नवनीत (हिन्दी) डाइजेस्ट, जुलाई 19.85 ए ज. पद्मनाभ एस. जी. वसुधारा धारणी, श्री महावीर जैन विद्यालय गोल्डन ज्युबीली वॉल्युम. डा. बनारसीदास जैन, जनांमें धारणी - पूजा. श्रीजैनसत्यप्रकाश - वर्ष 10, अंक 8, पृ. 163.64. एज. महावीर जैन विद्यालय गोल्डन ज्युबीली वोल्युम, इंग्लिश सेक्शन, पृ. 37 'चरोतर सर्वसंग्रह' भाग 1-2 8. डो. हरिलाल आर. गौदानी, 'महागुजरातनां शिल्प अने स्थापत्य' अमदावाद, ई. 11.1.2. मां 'वसुधग मातानुं मंदिर' . लेख. Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.229479
Book TitleVasudhara Dharni ane Vaso nu Vasudhara Mandir
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShilchandrasuri
PublisherZZ_Anusandhan
Publication Year
Total Pages6
LanguageHindi
ClassificationArticle & 0_not_categorized
File Size288 KB
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