________________ (3) तह य जयंतपराजि[ यविमा]णसव्वट्ठसिद्धेसु॥ 10 // सिद्धाण य सियधणकम्म-बंधमुक्ाण परमनाणीणं। आयरिया [ण तहेव य पं] चविहायारनिरयाणं // 11 // तह य उवज्झायाणं साहूणं झाणजोगनिरयाणं। तवसो(सु)सियसरीराणं सिद्धिवहूसंगमपराणं॥ 12 // सुयदेवया वि पंकय-पुत्थ[य]मणिरयणभूसियकराए। वेयावच्चगराण य समुद्भुओ मे इमो धूओ॥ 13 // एवं अभित्थुया मो (मे) भावसुगंधेण परमधूवेण। तित्थयरसिद्धपमुहा सव्वे वि कुणन्तु भवविरहं।। 14 / / Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org