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________________ 41 भगवान् महावीर का जीवन ऐतिहासिक जीवनी लिखने का तीसरा महत्त्वपूर्ण साधन परम्परागत श्राचारविचार है। भारत की जनता पर खास कर जैनधर्म के प्रचारवाले भागों की जनता पर महावीर के जीवन का सूक्ष्म-सूक्ष्मतर प्रभाव देखा जा सकता है; पर उसकी अमिट और स्पष्ट छाप तो जैन-परम्परा के अनुयायी गृहस्थ और त्यागी के प्राचार-विचारों में देखी जा सकती है / समय के हेर-फेर से, बाहरी प्रभावों से और अधिकार-भेद से आज के जैन-समाज का आचार-विचार कितना ही क्यों न बदला हो; पर यह अपने उपास्य देव महावीर के प्राचार-विचार के वास्तविक रूप की आज भी झाँकी करा सकता है। अलबत्ता इसमें छानबीन करने की शक्ति आवश्यक है। इस तरह हम ऊपर सूचित किए हुए तीनों साधनों का गहराई के साथ अध्ययन करके महावीर की ऐतिहासिक जीवनी तैयार कर सकते हैं, जो समय की मांग है। इ० 1647] Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.229047
Book TitleMahavir ka Jivan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorSukhlal Sanghavi
PublisherZ_Darshan_aur_Chintan_Part_1_2_002661.pdf
Publication Year1957
Total Pages16
LanguageHindi
ClassificationArticle & tirthankar
File Size195 KB
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