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________________ और योगप्रदीप ये दो हस्तलिखित ग्रन्थ भी हमारे देखने में आये है, जो पद्यबन्ध और प्रमाण में छोटे हैं। इसके सिवाय श्वेताम्बर संप्रदाय के योगविषयक ग्रन्थों का कुछ विशेष परिचय जैन ग्रन्थावलि पृ० १०६ से भी मिल सकता है । बस यहाँ तक ही में जैन योगसाहित्य समाप्त हो जाता है। बौद्ध सम्प्रदाय भ जैन सम्प्रदाय की तरह निवृत्ति प्रधान है। भगवान् गौतम बुद्ध ने बुद्धत्व प्राप्त होने से पहले छह वर्ष तक मुख्यतया ध्यानद्वारा योगाभ्यास ही किया। उनके हजारों शिष्य भी उसी मार्ग पर चले। मौलिक बौद्धग्रन्थों में जैन आगमों के समान योग अर्थ में बहुधा ध्यान शब्द ही मिलता है, और उसमें ध्यान के चार भेद नजर आते हैं। उक्त चार भेद के नाम तथा भाव प्रायः वही हैं, जो जैनदर्शन तथा योगदर्शन की प्रक्रिया में हैं। बौद्ध सम्प्रदाय में समाधिराज नामक ग्रन्थ भी है । वैदिक जैन और बौदसंप्रदाय के योग विषयक साहित्य का हमने बहुत संक्षेप में अत्यावश्यक परिचय १. सो खो अहं ब्राह्मण विविच्चेव कामेहि विविच्च अकुसलेहि धम्मेहि सवितकं सविचारं विवेकजं पीतिसुखं पदमझानं उपसंपज विहासि; वितकविचारानं वूपसमा अज्झत्तं संपसादनं चेतसो एकोदिभावं अवितकं अविचारं समाधिज पीतिसुखं दुतियज्झानं उपसंपज विहासि; पीतिया च विरागा उपेक्खको च विहासि; सतो च संपजानो सुखं च कायेन पटिसंवेदेसि, यं तं अरिया आचिक्खन्ति-उपेक्खको सतिमा सुखविहारी ति ततियज्झानं उपसंपज विहासि; सुखस्स च पहाना दुक्खस्स च पहाना पुब्बेव सोमनस्सदोमनस्सानं अत्थंगमा अदुक्खमसुखं उपेक्खासति पारिसुद्धिं चतुत्थज्झानं उपसंपज विहासि-मज्झिमनिकाये भयमेरवसुतं । ___ इन्हीं चार नानों का वर्णन दीघनिकाय सामञकफलसुत्त में है। देखो प्रो. सि. वि. राजवाड़े कृत मराठी अनुवाद पृ. ७२ । वही विचार प्रो. धर्मानंद कौशाम्बीलिखित बुद्धलीलासार संग्रह में है। देखो पृ. १२८। जैनसूत्र में शुक्लध्यान के भेदों का विचार है, उसमें उक्त सवितर्क आदि चार ध्यान जैसा ही वर्णन है । देखो तत्त्वार्थ श्र०६ सू० ४१-४४ । ___ योगशास्त्र में संप्रज्ञात समाधि तथा समापत्तिों का वर्णन है। उसमें भी उक्त सवितर्क निर्वितर्क आदि ध्यान जैसा ही विचार है। पा. सू. पा. १-१७, ४२, ४३, ४४ } Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.229043
Book TitleYogavidya
Original Sutra AuthorN/A
AuthorSukhlal Sanghavi
PublisherZ_Darshan_aur_Chintan_Part_1_2_002661.pdf
Publication Year1957
Total Pages38
LanguageHindi
ClassificationArticle & Yoga
File Size224 KB
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