SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 5
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ Imaki Headline [ २३७ के सन्दर्भ में बतायी और दूसरी बात यह है कि अगर आपकी नाभि खिल चुकी है तो वह सूर्य से इतनी ऊर्जा स्टोर कर लेगी कि जिसको पा लेने के पश्चात् फिर आपको भोजन की आवश्यकता नहीं रह जाती। आज के जमाने में इस बात को समझना कोई कठिन बात नहीं है। हमने एक इलेक्ट्रोनिक कालेज में जाकर देखा कि बहुत-बहुत रिसर्च (खोज) हो रही है। वहाँ हमने देखा कि ऐसे-ऐसे बल्ब तैयार कर लिये गये हैं जिनमें सूर्य से ऊर्जा का स्टोर कर लिया जाता है। वहाँ पर सूर्य की ऊर्जा से ६० बाट । का बल्ब जलाकर हमें दिखाया। अब भला बताओ एक ६० वाट का बल्ब जल .. सकता है धूप से, ऐसे ही और भी यन्त्र बने हैं जो कि आपके कमरों को ठण्ड के दिनों में भी गर्म कर सकते हैं। सूर्य की ऊर्जा से चलती हुई एक घड़ी भी । हमने देखी है। उस घड़ी में चाबी भरने की जरूरत नहीं रहती। वह सूर्य की । गर्मी से चलती है और दिन में वह इतनी गर्मी स्टोर कर लेती है कि फिर वह रात में भी चलती रहती है। " आज सारे विश्व के अन्दर ऊर्जा की जो इतनी कमी चल रही है उसके । लिये यह खोज चल रही है कि सूर्य के प्रकाश से कैसे ऊर्जा को संग्रह किया। जाय, आजकल कुछ रिक्शे ऐसे भी तैयार हो गये हैं जो कि सूर्य की ऊर्जा से चलते हैं। तो कहते हैं कि अगर सूर्य की ऊर्जा से रिक्शे घड़ी वगैरह तक चल सकते हैं तो फिर उससे हमारी नाभि में उस ऊर्जा का स्टोर कर लेने पर शरीर के अन्दर की मशीनरी चल उठे तो उसमें क्या आश्चर्य है। इस नाभि केन्द्र के द्वारा जब सूर्य की ऊर्जा का स्टोर किया जाता है तो इसे कहा है आतापनयोग। इस आतापन योग के द्वारा आपकी नाभि सौर्य ऊर्जा का स्टोर कर लेगी और वह आपकी सारी मशीनरी को चलायगी। आप जब भोजन करते हैं तो इसको पचाने के लिये आपको शक्ति चाहिये। उसमें आपके दांत काम करते हैं। आपकी आंतें काम करती हैं, आपका लीवर काम करता है तब जाकर ऊर्जा पैदा होती है और जब सीधे ऊर्जा मिल जाय तो फिर वह ऊर्जा सारे शरीर को मिलती रहेगी। . जितनी भी मशीनरी चलती हैं वे सामान्य रूप से ६ से 6 वोल्टेज से चलती हैं। इतनी ही ऊर्जा अगर शरीर को मिलती रहे तो वहाँ शरीर कृष न होगा। तो भगवान महावीर के पास यह पद्धति थी, उन्होंने सारी ऊर्जा को स्टोर कर लिया था जिससे उनको खाने पीने की भी आवश्यकता न थी। जैसे गर्म के अन्दर रहने वाले बच्चे को खाने पीने की क्या जरूरत ? वह तो
SR No.212299
Book TitleNaabhi Humara Kendra Bindu
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNalini Joshi
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages9
LanguageMarathi
ClassificationArticle & 0_not_categorized
File Size343 KB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy