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________________ 370 | पूज्य प्रवर्तक श्री अम्बालालजी महाराज-अभिनन्दन ग्रन्थ 000000000000 000000000000 6 न मुंडिएण समणो, ओंकारेण न बम्मणो न मुणी रण्णवासेणं कुसचीरेण तावसो / / समयाए समणो होइ बम्भचेरेण बम्भणो। मोणेण य मुणी होइ तवेण होइ तावसो |-उत्तराध्ययन 7 दस मुंडा पं० तं०-सोइंदिय मुंडे, चक्खुन्दिय मुंडे, घाणिन्दिय मुंडे, रसेन्दिय मुंडे, फासिन्दिय मुंडे, कोह मुंडे, माण मुंडे, माया मुंडे, जाव लोभमुंडे, दसमे सिरमुंडे / " ठाणांग सूत्र 10 वा ठाणा' दसविहे समणधम्मे पण्णत्ते तंजहा-खंति, मुत्ति, अज्जवे मद्दवे, लाघवे, सच्चे, संज मे, तवे, चियाए, बंभचेरवासे / --स्थानांग 10 8 सत्तावीसं अणगारगुणा पन्नत्ता तंजहा-पाणाइवायाओ वेरमण मुसावायाओ वेरमणं, अदिन्नादाणाओ वेरमणं, . मेहुणतो वेरमणं, परिग्गहाओवेरमणं, सोइंदियनिग्गहे, चक्खिंदियनिग्गहे, घाणिन्दियनिग्गहे जिभिंदियनिग्गहे फासिदियनिग्गहे, कोण विवेगे, माण विवेगे मायाविवेगे, लोभविवेगे, भावसच्चे, करण सच्चे, जोगसच्चे खमा, विरागया, मण समाहरणया, वयसमाहरणया, कायसमाहरणया, णाणसंपण्णया, दसण संपण्णया, चरित्त संपण्णया वेयण अहियासणया, मारणंतिय अहियासणया / 6 सत्तरसविहे संजमे पं० त० पुढवीकाय संजमे, आउकाय संजमे, तेउकाय संजमे, वाउकाय संजमे, वणस्सइकाय संजमे, बेइन्दिय संजमे, तेइन्दिय संजमे, चउरिन्दिय संजमे, पंचिदिय संजमे, अजीवकाय संजमे, पेहा संजमे, उवेहा संजमे, अवहटु संजमे, अप्पमज्जणा संजमे, मण संजमे, वइ संजमे, काय संजमे / -समवायांगं सूत्र 27 10 "असंजमे नियत्ति व संजमे य पवत्तणं"।-उत्तरा० सू० 31-2 . 12 दशवकालिक अध्ययन 4, गाथा 10 से 24 12 सम्यग्दर्शनज्ञानचारित्राणि मोक्षमार्ग:-आ० उमास्वाति, 13 “जगत्काय स्वभावो व संवेग वैराग्यार्थम"--आ० उमा० तत्त्वार्थ सत्र 14 नादंसणिस्स नाणं, नाणेण विणा न हुन्ति चरणगुणा--उत्तराध्ययन 15 कह चरे, कह चिट्ठ, कहमासे, कहं सए / कहं मुंजन्तो भासन्तो पावकम्मं न बंधइ / / 16 जयं चरे जयंचिठे जयमासे जयं सए जयं मुंजन्तो मासंतो पावकम्म ण बन्धइ / 17 "संजोगा विप्पमुक्कस्स अणगारस भिक्खुणो।"-उत्तरा० 1 18 पिंडं, सिज्जं च वत्थं च चउत्थं पाय मेव य / अकप्पियं न इच्छिज्जा, पडिगाहिज्ज कप्पियं ।-दशवं, अ०६, गा० 48 16 ठाणांग सू० 3 ठाणा 20 "कइविहा णं मंते आराहणा पण्णत्ता? गोयमा ! तिविहा आराहणा पण्णत्ता तेजहा--नाणाराहणा दंसणाराहणा चरित्ताराहणा।-भगवती सूत्र श० 8 उद्देशक १०वाँ AN D Thurna in Educational
SR No.212048
Book TitleShramanachar Ek Anushilan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorChandravatishreeji
PublisherZ_Ambalalji_Maharaj_Abhinandan_Granth_012038.pdf
Publication Year1976
Total Pages11
LanguageHindi
ClassificationArticle & Achar
File Size2 MB
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