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________________ श्री उदयसिंह भटनागर ३. गोंड (Gond) ३. तेलुगु (Telugu) ४. खोंद या कू (Khond or Ku) . ४. कन्नड़ (Kannad) ५. पोराँव (Oraon) ५. तुल, (Tulu) ६. राजमहल (Rajmahal) ६. कुड़गू-कूर्ग (Kudgu-Koorg) काडवेल ने इस सम्बन्ध में अपना मत प्रकट करते हुए यह संकेत किया है कि द्रविड़ और कोल एक ही जाति की भाषाए हैं। ओराँव भाषा को होडसन (Hodgson) ने द्रविड़ और कोल के बीच की कड़ी माना । इस प्रकार हम देखते हैं कि द्रविड़ और कोलारियन परस्पर सम्बन्धित है । काडवेल ने जार्ज केम्पबेल द्वारा कोलारियन समुदाय में सम्मिलित भाषाओं तथा होडसन द्वारा तमिल में सम्मिलित हो, मुडा, कौल, शबर आदि भाषाओं को द्रविड़ भाषाओं की सूची में नहीं लिया१ । डा० चाट्रा कोल आदि को प्राग्नेय परिवार में सम्मिलित करते हए उनके साथ द्रविड़ आदि जातियों के सम्बन्ध को स्वीकार करते हैं। नृतत्व (Anthropological) आधारों के अनुसार भारत के बाहर से आने वाली सात प्रमुख जातियों में से पूर्व में हिन्द-चीन-असम के मार्ग द्वारा पाने वाली आग्नेय (Austric) जाति है, जो आर्यों द्वारा निषाद कही गई है। संस्कृत साहित्य में भील का उतना प्राचीन उल्लेख नहीं मिलता जितना निषाद और कोल का मिलता है। इससे यह स्पष्ट सिद्ध होता है कि भील आर्य सम्पर्क में बहुत पीछे और उस समय आये जब ये आग्नेय द्रविड़ आदि से जंगलों में धकेल दिये गये थे। आर्यभाषा संस्कृत का सीधा प्रभाव तो राजस्थान पर कभी पड़ा ही नहीं। प्राकृत प्रभाव भी बहुत देर से आया । शबर और भील नाम लगभग साथ साथ पाते हैं । दोनों शिव के उपासक थे परन्तु शबर का प्रयोग भील के लिए नहीं हो सकता क्योंकि दोनों नाम अलग अलग सुरक्षित हैं । यह सम्भव है कि शबर का सम्बन्ध किरात से रहा हो । भील सम्बन्धी ऊपर दी गई कथाओं में से एक कथा में इनका राम के साथ सम्पर्क होने के सम्बन्ध में है। सम्भवत: इसका प्राधार आर्यों के साथ प्रथम सम्पर्क रहा हो। उस समय निषाद और कोल३२भी वर्तमान (31) “Tuda Kota, Gond and ku, though rude and uncultivated, are undoubtedly to be regarded as essentially Dravidian dialects equally with the Tamil, Canarese and Telugu. I feel some hesitation in placing in the same category the Rajmahal and Oraon, seeing that they appear to contain so large an admixture of roots and tongues, probably the Kolarian. I venture, however, to classify them as in the main Dravidian......The Oraon was considered by Mr. Hodgson as a connecting link between Kol dialects and the distinctively Tamilian family." __ -Caldwell : A Comparative Grammar of Dravidian Language-P.49. ३२-कोल और निषादों का जब अलग अलग उल्लेख मिलता है तो कोल को निषादों का वंशज मानना भी युक्ति संगत नहीं जान पड़ता। कोल-मुन्डा परिवार को आग्नेय में सम्मिलित करने के सम्बन्ध में भी अभी अभी आपत्ति उठाई गई है। विशप काडवेल ने तो इन्हें द्रविड़ परिवार में लिया है। हंगरी के एक विद्वान विलमोस हेवेजी (Vilmos Hevesy) ने इन्हें किसी अन्य परिवार की होने की ओर संकेत किया है । इसके यूराल-अल्ताई (Ural-Altai) श्रेणी की एक भाषा भारत में प्राई है जिसका सम्बन्ध कोल-मुन्डा से है, प्राग्नेय समुह की भाषाओं से उसका कोई सम्बन्ध नहीं। इसका प्रयोजन उस प्रान्त को किसी जाति के भारत में आने का है, जिसके वंशज कोल-मुन्डा हैं। यदि यह प्रमाणित हो जाता है और भील तथा कोलमुन्डा में किसी सम्बन्ध का प्रमाण मिल जाता है तो सामोग्र (Samoa) द्वीप समूह की काकेशियस जाति तक यह सम्बन्ध रेखा स्पष्ट हो जायगी और भील की प्राचीनता स्थापित हो जायगी। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.211827
Book TitleRajasthan Bhasha Puratattva
Original Sutra AuthorN/A
AuthorUdaysinh Bhatnagar
PublisherZ_Jinvijay_Muni_Abhinandan_Granth_012033.pdf
Publication Year1971
Total Pages35
LanguageHindi
ClassificationArticle & History
File Size3 MB
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