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________________ - यतीन्द्रसूरि स्मारक ग्रन्थ - आधुनिक सन्दर्भ में जैनधर्मआदर्श की विशेषताओं के अनुरूप अपने अंदर विशेषताएँ अतिरिक्त अनुकरण अधिकांशतः एक चेतन क्रिया होती है, जबकि विकसित करने का प्रयास करता है, जैसे बच्चे अपने माता- तदात्मीकरण का रूप प्रायः अचेतन प्रक्रिया का होता है। पिता या अन्य सदस्यों के व्यवहारों की नकल करके उनके जैसा विस्तृत रूप से तदात्मीकरण की रक्षायक्ति न केवल व्यवहार करने का प्रयास करते हैं। आजकल युवक एवं युवतियाँ व्यक्तित्व के अहम् के विस्तार तथा रक्षा में ही सहायक होती है, फिल्मी कलाकारों के हावभावों की नकल करते देखे जा रहे हैं। बल्कि व्यक्ति की दमित प्रबल इच्छाओं की पूर्ति का साधन भी इसी प्रकार विभिन्न दलों के कार्यकर्ता अपने दलों के अध्यक्षों होती है। उदाहरणार्थ जब एक विद्यार्थी में एक प्रसिद्ध डाक्टर जैसा व्यवहार करते देखे जाते हैं। इससे स्पष्ट है कि तदात्मीकरण अथवा प्रशासनिक अधिकारी बनने की इच्छा रहती है, परंत अपनी कमजोरी छिपाने का एक तरह का प्रयास है कभी-कभी कुछ कारणवश उसकी ये इच्छाएँ उस समय पूरी नहीं होने पातीं, व्यक्ति संभावित कष्ट से बचने के लिए उस व्यक्ति के अनुसार स व्याक्त के अनुसार तब वह अपनी इन दमित इच्छाओं की संतुष्टि बड़े होकर एक कार्य करने लगता है जो उसे कष्ट पहुँचाने में सक्षम है Bettetheim पिता के रूप में अपने एक लडके को डाक्टर तथा दसरे को 1943 / यहाँ तदात्मीकरण का रूप एक प्रकार से अनुकरण का प्रशसानिक अधिकारी बनाने में देखने में आती है। ऐसे ही एक ही होता है। अतः यहाँ अनुकरण तथा तदात्मीकरण के अंतर व्यक्ति स्वयं अशिक्षित रहने पर अपनी सन्तान को उच्च स्तर को स्पष्ट करना भी आवश्यक है। की शिक्षा-दीक्षा देकर अपने व्यक्तित्व की शिक्षा के दमित अनुकरण तथा तदात्मीकरण में अंतर . अभाव की पूर्ति में तदात्मीकरण की रक्षायुक्ति ही अपनाते देखा जाता है। ___ अनुकरण का रूप प्रायः स्थूल व भौतिक होता है, जैसे जब एक बालक अन्य बालकों को ताली बजाते देखकर स्वयं 9. उदात्तीकरण-उदात्तीकरण से तात्पर्य उस मानसिक भी ताली बजाने लगता है. तब व्यवहार का ऐसा रूप अनकरण विरचना से है, जिसके द्वारा व्यक्ति किसी लक्ष्य को प्राप्त करने कहलाता है, परंतु जब बालक या व्यक्ति अपना व्यवहार किसी में असफल होने पर किसी दूसरे लक्ष्य का चयन करके अपनी प्रतिष्ठित व्यक्ति के व्यवहार के अनुकूल उस जैसी प्रतिष्ठा, प्रभाव इच्छा पूति इच्छा पूर्ति करने का प्रयास करता है। यद्यपि नवीन लक्ष्य से उसे व सम्मान पाने के लिए करता है, तब उसके व्यवहार में उतनी संतुष्टि नहीं मिलती है जितनी की मूल लक्ष्य से संभावित तदात्मीकरण की मनोरचना देखने में आती है। दूसरे, अनुकरण .. थी फिर भी ऐसा करने से उसकी समस्या का समाधान हो जाता की प्रक्रिया में उद्दीपक विषय-वस्तु या घटना का होना एक है और समायोजन स्थापित करने में भी सहायता मिलती है। प्रकार से आवश्यक होता है, जबकि तदात्मीकरण के लिए व्यक्ति जैसे आक्रामकता के स्थान पर पहलवानी, मुक्केबाजी या खेलकूद के सम्मुख संबंधित व्यक्ति की उपस्थिति प्रायः इतनी आवश्यक में भाग लेना। इससे मिलती-जुलती एक और विरचना है जिसे नहीं होती। तीसरे, अनुकरण एक सरल, शारीरिक क्रिया है. जबकि प्रतिस्थापन कहते हैं इसमें भी व्यक्ति मूल लक्ष्य की जगह नया तदात्मीकरण एक अपेक्षाकृत जटिल मानसिक क्रिया है. इसके लक्ष्य चुनकर अपना काम चलाता है। Doordaroridrioridroiwomarwaridwardridrodaridrod- 2760AGribraridroidriomorrowinidroidroid-ideatheditorar Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.211184
Book TitleDwandwa aur Unka Nivaran
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRamnarayan, Ranjankumar
PublisherZ_Yatindrasuri_Diksha_Shatabdi_Smarak_Granth_012036.pdf
Publication Year1999
Total Pages14
LanguageHindi
ClassificationArticle & Psychology
File Size2 MB
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