SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 1
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ जैनागम साहित्य में स्तूप सागरमल जैन नागमों में स्तूप एवं स्तूप मह का सर्वप्रथम उल्लेख हमें आचारांग सूत्र के द्वितीय श्रुतस्कन्ध ( आयारचूला ) के तृतीय एवं चतुर्थ अध्ययनों में मिलता है' । आचारांग के पश्चात् अंग आगमों में स्थानांग और प्रश्नव्याकरण में; उपांग साहित्य में जीवाभिगम, जम्बूद्वीप प्रज्ञप्ति; पुनः व्याख्या साहित्य में हमें आवश्यकनियुक्ति ६, आवश्यकचूर्णि, व्यवहारचूर्णि तथा आचारांग, * 'बौद्ध स्तूप' पर आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी ( प्रा० भा०सं० एवं पु० विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी) में पठित निबन्ध | १ (क). से भिक्खू वा भिक्खुणी वा गामाणुगामं दूइज्माणे "रुक्शं वा चेइय-कडं, थूभं वा चेइयकडं " णो....... णिज्झाएज्जा । - आचारांग (द्वितीय श्रुतस्कन्ध- आयारचूला ), ३।४७ १ (ख) से भिच्खू वा भिक्खुणी वा जहा वेगइयाई रुवाई 'रुक्ां वा चेइय-कडं.... वा, सुठुकडे ति वा, “साहुकडे ति वा, कल्लाणे ति वा " । "सुकडे ति "थूभ - महेसु वा चेतिय- महेसु वा " (ग) से भिक्खू वा भिक्खुणी वा " ..... णो पडिगा हेज्जा । २. ......तासि णं मणिपेढियाणं उवरिं चत्तारि चत्तारि चेइयथूभा पण्णत्ता । ३ (क ). चिति-वेदि - खातिय- आराम - विहार-थूभ "य अट्ठाए पुढवि हिंसंति मंदबुद्धिया । ( ख ). और भी देखें - प्रश्नव्याकरण, ४१४ । ४. तहेव महिंदज्झया चेतियरुक्खो चेतियथभे पच्चत्थिमिल्ला मणिपेढिया पिडिमा । ५. — जीवाभिगम, ३।२।१४२ । ... खिप्पामेव भो देवाणुप्पिआ तित्थगरचिइगं जावअणगारचिइगं च खीरोदगेणं णिव्वावेह, तए णं ते मेहकुमारा देवा वित्थगरचिइगं जाव णिव्वावेंति, तए गं से सक्के देविंदे देवराया भगवओ तित्थगरस्स उवरिल्लं दाहिणं सकहं गेहइ" 'तए णं से सक्के वयासी सव्वरयणाम्ए महइमहालए तओ चेइअथूभे करेह । - जम्बूद्वीपप्रज्ञप्ति, २ । ३३ । ६. निव्वाणं चिइगाई जिणस्स इक्लाग सेसयाणं च । सकहा थूभ जिणहरे जायग तेणाहिअग्गित्ति ॥ - आवश्यक निर्युक्ति, ४५ । ७ (क). तण से सक्के बहवे भवणपति जाव वेमाणिया एवं वयासीखिप्पामेव भो तओ चेइअ - थूभे कह । — वही, ४।२१ । 'तहप्पगारं असणं व पाणं वा... ( ख ). थूभागं एगं तित्थगरस्स व सेसाणं एगुणस्स भाउय सयस्स । Jain Education International - वही, ११२४ । ——स्थानांग, ४।३३९ । - प्रश्नव्याकरण, १।१४ । - आवश्यक चूर्णि, ऋषभनिर्वाण प्रकरण, पृ० २२३ । For Private & Personal Use Only - आवश्यक चूर्ण, अष्टपद चैत्य प्रकरण, पृ० २२७ ॥ www.jainelibrary.org
SR No.211048
Book TitleJainagam Sahitya me Stoop
Original Sutra AuthorN/A
AuthorSagarmal Jain
PublisherZ_Aspect_of_Jainology_Part_2_Pundit_Bechardas_Doshi_012016.pdf
Publication Year1987
Total Pages9
LanguageHindi
ClassificationArticle & Art
File Size814 KB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy