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________________ करणक विषयानुक्रम सन्धि-११ श्रेणिक पुत्र गजकुमारकी दीक्षा [ ११४- ११९ ] १ श्रेणिक पत्नी धनश्रीका गर्भधारण, दोहला तथा गजकुमारका जन्म । २ गजकुमारकी दीक्षा, दन्दीपुरकी यात्रा तथा वहाँ पर्वतपर आतापन योग । ३ शिलान्तापनले उपसर्ग, गजकुमारका मोक्ष और राजा तथा मन्त्रीका जैनधर्म-प्रहृण । सन्धि - १२ तीर्थंकरका धर्मोपदेश [ १२० - १४३ ] ८५ १ भव्यों की प्रार्थनापर जिनेन्द्रका उपदेश -- जीवोंके भेद-प्रद । २ एकेन्द्रियादि जीवोंके प्रकार । ३ जीवोंके संज्ञी असंज्ञी भेद व दश प्राण | ४ गति, इन्द्रिय आदि चतुर्दश जीव-मार्गणाएँ व गुणस्थान ५ कर्मबन्ध व कर्मभेद-प्रभेद । ६ कषायों का स्वरूप तथा मोहनीय कर्मकी व अन्य क्रमको उसर - प्रकृतियाँ । ७ नाम, आयु, गोत्र व अन्तराय कर्मोंके भेद | ८ सिद्ध जीवोंका रूप ९ अजीव तत्त्वोंका स्वरूप | १० पुद्गल द्रव्यके गुण उपदेश सुनकर अनेक नरेशों की प्रव्रज्या ।
SR No.090534
Book TitleVeerjinindachariu
Original Sutra AuthorPushpadant
AuthorHiralal Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year1974
Total Pages212
LanguageHindi, Apbhramsa
ClassificationBook_Devnagari & Story
File Size3 MB
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