SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 769
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ७४२ ] तिलोयपण्णी [ गाया : २७४५ - २७६० क्षेत्रफल :- वर्गयोजनों में हैमवत क्षेत्रका २०१२१८७० १०४ । हरिवर्षका १६४८०४१२५ | विदेहक्षेत्रका ३२२०७७९२ १६७७२३ । रम्यकक्षेत्रका ८०५१९४८४१यक्षेत्रका २० १२१८७०१०४३१३ और ऐरावत क्षेत्रका ५०३२४६७५२६.१३ वर्ग योजन क्षेत्रफल है । जंबूदीव फलप्यमानेन भाडे | क्षेतफलं फिक्स, बारस कवि सम सलागाओ ।।२७५८।। घातकीखण्डके जम्बूद्वीप प्रमाण खण्ड खिवीए, - ▾ - १४४ । अर्थ :- जम्बूद्वीप के फलप्रमाणसे घातकीखण्डका क्षेत्रफल करनेपर यह बारह के वर्गरूप अर्थात् एकसौ चवालीस-शलाका प्रमाण होता है २७१६ - विशेवार्थ : - धातको स्वण्डके बाह्यसूत्रों व्यास १३ लाख) के वर्ग मेंसे उसीके अभ्यन्तर सूजी व्यास ( ५ लाख ) के वर्गको घटाकर जम्बूद्वीप के व्यासके वर्गका भाग देनेपर एकसी चवालीस शलाका प्राप्त होती हैं । अर्थात् घातकी मडके जम्बूद्वीप बराबर एकसो बदालीस धड होते हैं। यथा -- ( १३००००० - ५००००० ) + १००००० = १४४ । विजयादिकोंका शेष वर्णन · अबसेस वन्मणाचो, सव्वाणं विजय सेल-सरियाणं । कुंड - दहावीगं वि व जंबूदीवस्स सारिन्छो १२७५६।। एवं विष्णासो लमतो । :- सम्पूर्ण क्षेत्र, पर्वत, नदी, कुण्ड और द्रहादिकोंका शेष वर्णन जम्बूद्वीप के सदृश ही समझना चाहिए ।। २७५६ ॥ इसप्रकार दिन्यास समाप्त हुआ । भरतादि अधिकारोंका निरूपण भर- बसु धर-पहुवि, जाव य एराबवो ति अहिवारा । जंबूदीचे उ सं सव्वं एष वयं ।।२७६० ॥ अर्थ :- भरतक्षेत्र से ऐरावतक्षेत्र पर्यन्त जितने अधिकार जम्बूद्वीपके वर्णन में कहे गये हैं। ये सब यहाँ भी कहने चाहिए ।। २७६०१ ।
SR No.090505
Book TitleTiloypannatti Part 2
Original Sutra AuthorVrushabhacharya
AuthorChetanprakash Patni
PublisherBharat Varshiya Digambar Jain Mahasabha
Publication Year
Total Pages866
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Geography
File Size12 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy