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________________ गाथा : १४७७-१४८० ] पउत्यो महाहियारो [१२६ म :-प्रजितनाभिका लिनुहोला घासालाना साबासह हजार छनमो. असाल वर्ष प्रमाण है ||१४७६॥ परिसाणि तिष्णि साखा, तीस-सहस्स-ति-सयसेतीसा। कोमार - भट्ठ • समया, कमप्तो पोवाल - बहस |१४७७॥ । ३३३३३३३३३३३३ । प्रम:-पीठाल (पीठ ) रुखका कुमार काल और तप-म काल क्रमपा: तीन लाख संतीस हजार तीनसौ तेतीस वर्ष प्रमाण है ।।१४७७॥ तिय-सबखाणि वासा, तेसोस-सहस्स-ति-सय बोत्तोसा । संजय - काल - पमाणं, गिट्टि बसम - रहस्स ।।१४७८।। । ३३३३३४ । प्रपं:-दसवें (पीठ ) रुद्रके संयम-कासफा प्रमाण तीन नाल तोम हजार तीनसो चांतीस वर्ष निर्दिष्ट किया गया है ।।१४७८।। सग - वासं कोमारो, संजम - कालो हवेवि घोत्तोस । अस्वीस भंग - कालो, एपारसमस्स हस ||१४७६ ।। ।। ३४ ॥ २८ ॥ प्रय:-ग्यारहवं { सात्यकिपुत्र ) रुद्रका कुमार काल सात वर्ष. संयम काल चौतीस वर्ष भौर संयम-मन-कास प्राईस वर्ष प्रमाण है ।।१४७९।। होकी पर्यायान्तर प्राप्तिहो रहा सत्तए, पंच म छकुम्मि पंचमे एस्को । दोष्णि चतस्ये परिवा, एक्करसो तबिय - णिरमम्मि ॥१४८०।। 1 सद्दा-गा। अर्थ :- इन ग्यारह रुदोंमेंसे दो रुद्र सातवें नरकमें, पांच छठेमें, एक पाप में, दो पोयेमें और पन्तिम ( प्यारहवा ) रुर तीसरे नरक में गया है ॥१४८०॥ । इसप्रकार रुद्रोंका कपन समाप्त हुआ ।
SR No.090505
Book TitleTiloypannatti Part 2
Original Sutra AuthorVrushabhacharya
AuthorChetanprakash Patni
PublisherBharat Varshiya Digambar Jain Mahasabha
Publication Year
Total Pages866
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Geography
File Size12 MB
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