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________________ क्र० सं० १५. १६ १७ १८ १९ ૩૦ २१ २२ २३ २४ २५ २६ २७ २८ २६ ३० ३१ ३२ ३३ ૩૪ ३५ ३६ ३७ ३८ ३६ विषय लोक का प्रायत चौरस क्षेत्र लोक का नियंगायत क्षेत्र लोक में यवमुरजाकृति लोक में यवमध्यक्षेत्र की आकृति १ लोक में मन्दरमेरु की आकृति लोक की दूष्याकार रचना लोक में गिरिकटक की प्रकृति सामान्य अधोलोक एवं ऊद्धयित अधोलोक तिर्यगायत अधोलोक * अधिकार दृथ्य ऊर्ध्वलोक गिरिकटक ऊर्ध्वलोक लोक के सम्पूर्ण वातचलय लोक के नीचे तीनों पवनों से अवरुद्ध क्षेत्र अधोलोक के पार्श्वभागों का घनफल $ १ १ अधोलोक की मुरजाकृति १ यवमध्य अधोलोक मन्दरमेरु अधोलोक की प्राकृति १ वष्य अधोलोक १ गिरिकटक अधोलोक ऊर्ध्वलोक सामान्य ऊर्ध्यायत चतुरस्रक्षेत्र तिर्यगायत चतुरस्रक्षेत्र अबमुरज ऊध्र्वलोक यवमध्य ऊर्ध्वलोक मन्दरमेय ऊर्ध्वलोक की आकृति १ १ १ १ १ १ १ गाथा सं २१७ २१७ २१८-२२० २२१ २२२ २३४ २३६ २३८ २३८ २३९ २४० २४३-४४ २५०-५१ २५०-५१ २५४ २५४ २५५-५६ २५५-५६ २५७ २५७ २६६ २६६ २७६ T पृष्ठ संख्या 9 १६७४ ७५ ७७ ७८ ८४ ८६ ८८ ८६ ९० ९१ ६४ ६७ EE १०१ १०२ १०३ १०४ १०५ १०६ ११० १११ ११५ १२० १२१-१२३
SR No.090504
Book TitleTiloypannatti Part 1
Original Sutra AuthorVrushabhacharya
AuthorChetanprakash Patni
PublisherBharat Varshiya Digambar Jain Mahasabha
Publication Year
Total Pages434
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Geography
File Size8 MB
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