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________________ ३१० ] तिलोयपण्णसी [ गाथा : १५६-१५९ एक्क-पलिदोवमाऊ सेणाधीसाण होदि चमरस्त । वइरोयणस्स अहियं भूदाणवस्य कोटि-पुथ्याणि ।।१५६॥ प ११ प १ । पुव्व को १। अर्थ :- चमरेन्द्र के सेनापति देवोंकी प्रायु एक पल्योपम, वैरोचन के सेनापति देवोंकी इससे अधिक और भूतानन्दके सेनापति देवोंकी आयु एक पूर्व-कोटि है ।।१५६।। धरणाणंदे अहियं वच्छर-कोडी हवेदि वेणुस्स । 'सेरणा-महत्तराऊ अदिरित्ता' वेणुधारिस्स ॥१७॥ पु० को० १ । १० को० १ । व० को० १ । मर्थ :-धरणानन्दके सेनापति देवोंकी प्रायु एक पूर्वकोटिसे अधिक, देणुके सेनापति देवोंकी एक करोड़ वर्ष और वेणुधारीके सेनापति देवोंकी प्रायु एक करोड़ वर्षसे अधिक है ।।१५७॥ पत्तेक्कमेक्क-लक्खं पाऊ सेरणावईण जावन्यो । सेसम्मि वििरणदे "अदिरित उत्तरदम्मि ॥१५८।। २० १ ल । व १ ल । पर्य :-शेष दक्षिणेन्द्रोंमें प्रत्येक सेनापतिकी प्रायु एक लाख वर्ष और उत्तरेन्द्रोंके सेनापतियोंकी आयु इससे अधिक जाननी चाहिए ।।१५८।। पलिदोवमद्धमाऊ प्रारोहक-वाहणाण चमरस्स । वइरोयणस्स अहियं भूवाणंदस्स कोडि-बरिसाइं ॥१५॥ प।५३ ।व को १। मर्थ :-चमरेन्द्रके प्रारोहक वाहनोंकी पापु अर्ध-पल्योपम, वैरोचनके प्रारोहक-बाहनोंकी अर्ध-पल्योपमसे, अधिक और भूतानन्दके प्रारोहक वाहनोंको आयु एक करोड़ बर्ष होती है ।।१५९।।। २., ब. क. ज.ठ. अधिरित्ता। ३.६. सेमाचईण। ४. ब, क. १.८. ब.ज.प. सेसा। अधिरित, ज, 3. अतिरित्त'।
SR No.090504
Book TitleTiloypannatti Part 1
Original Sutra AuthorVrushabhacharya
AuthorChetanprakash Patni
PublisherBharat Varshiya Digambar Jain Mahasabha
Publication Year
Total Pages434
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Geography
File Size8 MB
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