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________________ गाथा : १०-१२ ] तदिन महाहियारो | २६७ अर्थ :- असुरकुमार, नागकुमार, सुपर्णकुमार, द्वीपकुमार उदधिकुमार स्तनितकुमार, विद्यत्कुमार, दिक्कुमार, अग्निकुमार और वायुकुमार इसप्रकार भवनवासी देव दस प्रकारके 11211 || विकल्पों का वर्णन समाप्त हुआ || २ || भवनवासियोंके चिह्न चूडामरि-ग्रहि गरुडा करि-मयरा वढमाण वज्ज-हरी । कलसो तुरयो मउडे कमसो चिण्हाणि एदाणि ॥१०॥ || चिण्हा समत्ता ||३|| अर्थ :- इन देवोंके मुकुटोंमें क्रमश: चूडामणि, सर्प, गरुड़, हाथी, मगर बर्धमान ( स्वस्तिक ), बच्च, सिंह, कलश और तुरंग ये चिह्न होते हैं ||१०|| 11 चिह्नोंका वर्णन समाप्त हुआ ||३|| भवनवासी देवोंकी भवन संख्या चट्टी चउसीदी बाहत्तर होंति छस्सु ठाणेसु । छाहतरि छण्णउदी 'लक्खारिंग भवरणवासि - भवराणि ॥११॥ ६४ ल । ८४ ल । ७२ ल । ७६ ल । ७६ ल । ७६ ल । ७६ ल । ७६ ल १ ७६ ल । ६६ ल । vari' भवणाणं एक्कसि मेलिदारण परिमाणं । बाहत्तरि लक्खाणि कोडीश्रो सत्तमेत्ताओ ॥१२॥ ७७२००००० ॥ भवरण संखा गदा ॥४॥ १. ६. ब. क. ज. ठ. एक्कारिण । २. द. ज. एवाणं भवरणाक्कस्सि । उ. एदाणि भवाक्कस्सि ।
SR No.090504
Book TitleTiloypannatti Part 1
Original Sutra AuthorVrushabhacharya
AuthorChetanprakash Patni
PublisherBharat Varshiya Digambar Jain Mahasabha
Publication Year
Total Pages434
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Geography
File Size8 MB
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