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________________ तदिओ महाहियारो मङ्गलाचरण भव्य - जरा मोक्ख जणणं सुणिद-देविंद- पणद-पय-कमलं । णमिय प्रहिणंदणेसं भावरण- लोयं पयेमो ॥१॥ अर्थ :-- भव्य जीवोंको मोक्ष प्रदान करने वाले तथा मुनीन्द्र ( गणधर ) एवं देवेन्द्रोंके द्वारा वन्दनीय चरण कमलवाले अभिनन्दन स्वामीको नमस्कार करके भावन-लोकका निरूपण करता हूं ॥ 11 भावनलोक-निरूपण में चौबीस अधिकारोंका निर्देश भावरण- णिवास-खेत्त' भवण सुराणं' वियप्प- चिण्हाणि । भवणाणं परिसंस्था इंदार पमाण - णाभाई ॥२॥ दक्षिण-उत्तर - इंदा पत्तक्कं ताण भवण- परिमाणं । अप्प - महद्धिय-मज्झिम: भावण- देवाण भवणवासं च ||३|| भवरणं वेदी कूडा जिणघर पासाद इंद-भूदोश्रो । भवणामराण संखा श्राउ-प्रमाणं जहा जोगं ॥४॥ उस्सेहोहि पमाणं गुणठाणादीणि एक्क समयस्मि । उपज्जण- मरगाण य परिमाणं तह य श्रागमणं ॥५॥ भावणलोयस्साऊ-बंधण - पाप्रोग्ग सम्मत्त गहण हेक अहिवारा १. ६. ब. क. पूरण । २. व । भवरणं वासं । भाव-भेदा य । एत्थ चसं ॥६॥
SR No.090504
Book TitleTiloypannatti Part 1
Original Sutra AuthorVrushabhacharya
AuthorChetanprakash Patni
PublisherBharat Varshiya Digambar Jain Mahasabha
Publication Year
Total Pages434
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Geography
File Size8 MB
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