SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 307
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ २३०. ] तिलोयपात्ती [ गाथा : २४४-२४७ अर्थ : मेघा पृथिवीमें एक धनुष, दो हाथ, २२ अंगुल और तीनसे भाजित एक अंगुलके दो-भाग-प्रमाण हानि-वृद्धि जाननी चाहिए ।।२४३।। तीसरी पृथिवीमें पटल क्रमसे नारकियोंके शरीरका उत्सेध सत्तरसं चावाणि चोत्तीसं अंगुलाणि दो भागा। तिय भजिदा मेघाए उवनो तत्तिदम्मि जीवाणं ॥२४४॥ ध १७, अं३४ भा । अर्थ :-मेघा पृथिवीके तप्त इन्द्रकमें जीवोंके शरीरका उत्सेध सत्तरह धनुष, चौंतीस अंगुल ( १ हाथ, १० अंगुल ) और तीनसे भाजित अंगुलके दो-भाग-प्रमाण है ॥२४४।। एक्कोणवीस दंडा अट्ठावीसंगुलाणि 'तिहिदाणि । तसिदिदयम्मि तदियक्खोरणीए णारयाण उच्छेहो ॥२४५॥ ध १९, अंः । अर्थ :-तीसरी पृथिवीके असित इन्द्रकमें नारकियोंका उत्सेध उन्नीस धनुष और तीनसे भाजित अट्ठाईस (९3) अंगुल प्रमाण है ।।२४५।। वीसए सिखासयाणि असीदिमेत्तारिग अंगुलाणि च । "तविय-पुढवीए तणि दयम्मि णारइय उच्छेहो ॥२४६॥ दं २० । अं८०। अर्थ :-तीसरी पृथिवीके तपन इन्द्रक बिलमें नारकियोंके शरीरका उत्सेध बोस धनुष अस्सी (३ हाथ ८) अंगुल प्रमाण है ॥२४६।। णउदि-पमारणा हत्था 'तिदय-विहत्तारिण वीस पथ्याणि । मेघाए तावणिवय-ठिदाण जीवाण उच्छेहो ॥२४७॥ है ६०, अं ! १. द. क. 8. तिहिदाणं । २. द. ब, कं. . तदियं चम पुढचौए। ३, द. तीयविहत्थाणि, क, तीद विहत्याणि, ठ. तीदी विहत्यारिण, व. तदिविहत्ताणि । ४. द. ब. क. उ. तवरिण दय ।
SR No.090504
Book TitleTiloypannatti Part 1
Original Sutra AuthorVrushabhacharya
AuthorChetanprakash Patni
PublisherBharat Varshiya Digambar Jain Mahasabha
Publication Year
Total Pages434
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Geography
File Size8 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy