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________________ गाथा : १८४-१८५ ] विदुनो महाहियारो [ २०७ अर्थ :-चौथी पृथिवीमें श्रेणीबद्ध बिलोंका अन्तराल, बाईस हजारमें नौ का भाग देनेपर जो लब्ध प्राबे, उतने (२७.९ : १२:४३, 13 -... २४४४३५५५५ ) धनुष कम तीन हजार छह सौ छयासठ योजन प्रमाण है ॥१८॥ विशेषार्थ :-(२४००० - २०००)-(3xx1) =(२२६०० – १)xi = ३६६५३५ योजन अथवा ३६६५ योजन ५५५५५ धनुष अन्तराल है। पाँचवें नरकमें श्रेणीबद्धोंका अन्तराल 'अट्ठाणउदी जोयण-चउदाल-सयारिण छस्सहस्स-धणू । धूमप्पह-पुढवीए सेडीबद्धारण विच्चालं ॥१४॥ जो ४४९८ । दंड ६०००। पर्थ :-धूमप्रभा पृथिवीमें श्रेणीबद्ध बिलोंका अन्तराल चार हजार चार सौ अट्ठानब योजन और छह हजार धनुष है ॥१८४।। विशेषार्थ :-( २०००० - - २०००)-(xix) =(१९६० -५)x= ४४६८ योजन अथवा ४४९८ योजन ६००० धनुष अन्तराल है। छठवें नरकमें श्रेणीबद्धोंका अन्तराल अद्वारगउदी णव-सय-छ-सहस्सा जोयणाणि मघवीए । दोणि सहस्साणि धणू सेढीबद्धाण विच्चालं ॥१८॥ जो ६६६८ | दंड २००० । ...अर्थ :- मधवी पृथिवीमें श्रेणीबद्ध बिलोंका अन्तराल छह हजार नौ सौ अट्ठानबै योजन और दो हजार धनुष है ।।१८५।। विशेषार्थ :-(१.६००० - २०००)--(४५६४३)*(३ – १)=(""०० +३) x३=६९९८१ योजन या ६६६८ यो० २००० दण्ड प्रमाण अन्तराल है । : १. ब. अट्ठाणणउदी।
SR No.090504
Book TitleTiloypannatti Part 1
Original Sutra AuthorVrushabhacharya
AuthorChetanprakash Patni
PublisherBharat Varshiya Digambar Jain Mahasabha
Publication Year
Total Pages434
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Geography
File Size8 MB
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