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________________ गाथा : २४० ] पढमो महाहियारो [६१ करने पर भी ( ३४३ : १४-२४३ ) x ५ = १२२६ धनराजू प्राप्त होता है, इसीलिए गाथामें चौदहसे भाजित और पाँचसे गुरिणत मुरजका घनफल कहा है । इसप्रकार ७३: + १२२१-१९६ धनराजू यबमुरज अधोलोकका घनफल प्राप्त होता है। बदमाग बमोनोकका माल एवं प्राकृति घणफलमेक्कम्मि जये लोगो 'बादाल-भाजिदो होदि । तं चउवोसष्पहदं सत्त-हिदो चउ-गुणो लोगो ॥२४०॥ अर्थ :-यबाकार क्षेत्रमें एक यवका धनफल बयालीससे भाजित लोकप्रमाण है। उसको चौबीससे गुणा करनेपर सातसे भाजित और चारसे गुरिणत लोकप्रमारण समस्त यवमध्यक्षेत्रका घनफल निकलता है ।।२४०॥ ५. यबमध्य अधोलोकका घनफल : विशेषार्थ :-अधोलोकके सम्पूर्ण क्षेत्रमें यवोंकी रचना करनेको यवमध्य कहते हैं । सम्पूर्ण अधोलोकमें यवोंकी रचना करनेपर २० पूर्ण यव और ८ अर्धयव प्राप्त होते हैं। जिनकी आकृति इसप्रकार है : १. क. बादार श भाजिदो।
SR No.090504
Book TitleTiloypannatti Part 1
Original Sutra AuthorVrushabhacharya
AuthorChetanprakash Patni
PublisherBharat Varshiya Digambar Jain Mahasabha
Publication Year
Total Pages434
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Geography
File Size8 MB
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