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________________ [८६ गाथा : २३६ ] पढमो महाहियारो ३. तिर्यगायत अधोलोकका घनफल :-(त्रिलोकसार गा० ११५ के आधारसे) जिस क्षेत्रकी लम्बाई अधिक और ऊँचाई कम हो उसे तिर्यगायत क्षेत्र कहते हैं । अधोलोककी भूमि ७ राजू और मुख १ राज है । ७ राजू ऊँचाई के समान दो भाग करने पर नीचे (संख्या १) का भाग ३, राजू ऊँचा, ७ राजू भूमि, ४ राजू मुख और ७ राजू बेध ( मोटाई ) वाला हो जाता है । ऊपरके भागके चौड़ाईकी अपेक्षा दो भाग करनेपर प्रत्येक भाग ३: राजू ऊँचा, २ राजू भूमि, ३ राजू मुख और ७ राजू वेध वाला प्राप्त होता है। इन दोनों ( संख्या २ और संख्या ३ ) भागोंको नीचे वाले { संख्या १) भागके दायों और बायीं ओर उलट कर स्थापन करनेसे ३६ राज ऊँचा और पाठ राजू लम्बा तिर्यगायत क्षेत्र बन जाता है । - शाज --राज़ - . -शान - राजू--- V धनफल : यह पायतक्षेत्र ८ राजू लम्बा, ३३ राजू चौड़ा और ७ राजू मोटा है, प्रतः ६४३४५= १६६ घन राजू तिर्यगायत अधोलोकका घनफल प्राप्त हो जाता है। यवमुरज अधोलोककी प्राकृति एवं घनफल खेत-जवे विदफलं चोइस-भजिवो य तिय-गुणो लोप्रो । मुरय-मही विदफलं चोइस भजिदो य परण-गुणो लोश्रो ॥२३६।।
SR No.090504
Book TitleTiloypannatti Part 1
Original Sutra AuthorVrushabhacharya
AuthorChetanprakash Patni
PublisherBharat Varshiya Digambar Jain Mahasabha
Publication Year
Total Pages434
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Geography
File Size8 MB
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