SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 129
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ५२ | तिलोयपण्णत्ती [ गाथा : १८१ समाधान :- ३ राजू दूरी पर जब ऊँचाई ७ राजू है, तब दो राजू दूरी पर कितनी ऊँचाई प्राप्त होगी ? इस त्रैराशिक नियमसे जानी जाती है । यथा राज् इस्तू अन्जू सं त्रिकोण एवं लम्बे बाहु युक्त क्षेत्रके घनफल निकालने की विधि एवं उसका प्रमाण भुज- पडिभुज - मिलिद्ध विदफलं वासमुदय-वेद-हवं । 'एक्काययत्त-बाहू वासद्ध-हवा य वेव-हदा ॥ १८१॥ अर्थ :- [१] भुजा और प्रतिभुजाको मिलाकर प्राधा करनेपर जो व्यास हो, उसे ऊँचाई और मोटाईसे गुणा करना चाहिए। ऐसा करनेसे त्रिकोण क्षेत्रका घनफल निकल प्राता है । [२] एक लम्बे बाहुको व्यासके आधे से गुणाकर पुन: मोटाईसे गुणा करनेपर एक लम्बे बाहु-युक्त क्षेत्रके घनफलका प्रमाण आता है ।। १८१ ॥ विशेषार्थ : - गा० १८० के विशेषार्थ लम्बी रेखाका नाम भुजा और ॐ राज लम्बी रेखा (*+ *} == ॐ५ राजू है । इसको आधा करने पर ( और मोटाई का गुणा कर देने पर (३ x) = चतुर्भुजका घनफल है । चित्रण में "स" नामक विषम चतुर्भुजमें ७ राजू का नाम प्रतिभुजा है । इन दोनोंका जोड़ ३ ) - राजू प्राप्त होते हैं। इनमें ऊंचाई अर्थात् ४० घन राजू "रा" नामक विषम x = rh इसीप्रकार "ब" चतुर्भुजका घनफल भी प्राप्त होगा । यथा : राजू भुजा + राजू प्रतिभुजा = राजू । तत्पश्चात् घनफल = x ३ + = ३१ अर्थात् २४१ घनराजू "ब' नामक विषम चतुर्भुजका घनफल प्राप्त होता है । यही धनफल गाया १८२ में दर्शाया गया है । १. द. एक्कायजत्त, ज. क. ठ. एक्कायसत्त ।
SR No.090504
Book TitleTiloypannatti Part 1
Original Sutra AuthorVrushabhacharya
AuthorChetanprakash Patni
PublisherBharat Varshiya Digambar Jain Mahasabha
Publication Year
Total Pages434
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Geography
File Size8 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy