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________________ नवमोध्यायः सगरता है मति ममामाजी नानानन, न पार करयाना देने में मेईना निहन व निम हो वर मात्रिक सारक व १२ १६.६ जाता है .. कि जर भार वहा - पायनियन ने दो मे मोर FI . , बयाकयच. में : ही अधिमान है, २. मामा या निको ... -5 चाइ हो रहा है, ईशेष ग ने पको पर्य. , सहाय कायों में प्रादि कर लेने का व्ययग 75.13 में देने, सिमरा : दाप । अप रखना ही कही है। स रकार नियो । ...... रहा किन मने किलो मा पनि पनि .. पवती ने क ल पर थन य ... म ।। है. कार से इ रश निरूपा कर देने हो क क म प्र हो ना बहन है । यह तो न पहना, वो अंक ३ .१ " क स्थान पर उपदेश दिया गया है। पर अचाकी " द से माह, समता, ग, संघ का त्याग करको दर भावि ' चत रूप से उपाधियो ६ म का है, और नहीं पन्दर . प . . । चमों की मदर निज के लिये रिहों को 3 है। गत तक जाने है, विसो किया ये कर दिन के पदार्थ नजि स्वरूप और काम पर जनप. .वरना होने के म २.पर है, तर उर" गो कार को के र के ये उपेन पूर्गा दुबार, तबाहर पु रमा नियामतपसो " -:-हीना समार साग ६२ने, ये है : सर म वनिो द्वारा 2 ह हे है। ..
SR No.090501
Book TitleTattvarthshlokavartikalankar Part 7
Original Sutra AuthorVidyanandacharya
AuthorVardhaman Parshwanath Shastri
PublisherVardhaman Parshwanath Shastri
Publication Year1980
Total Pages498
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Philosophy, Tattvartha Sutra, Tattvartha Sutra, & Tattvarth
File Size15 MB
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