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________________ ४५८ सिद्धान्तसार दीपक लवण समुद्र में एक सूर्य से दुसरे सूर्य के प्रन्सर का प्रमाण EEEEEN योजन है। घातकोखण्ड में एक सूर्य से दूसरे सूर्य का अन्तर ६६६६५१ योजन है । कालोदधि समुद्र में सूर्य से सूर्य का अन्तर ३८०६४,१०० योजन है, और पुष्कराध द्वीप में सूर्य से सूर्य का अन्तराल २२२२१ या ३॥ योजन प्रमाण है। अब मानुषोत्तर पर्वत के बाह्य भाग में सूर्य चन्द्र प्रादि ग्रहों के प्रवस्थान का निरधारण करते हैं :-- मानुषोत्तरतो बाह्य भागे लक्षार्धयोजनान् । मुक्त्वा ज्योतिष्कदेवानां प्रथमं वलयं भवेत् ॥७१।। बलयेऽस्मिश्चतुश्चत्वारिंशदाशत प्रमाः । स्युश्चन्द्रस्तिस्समाः सूर्याः सर्वे ग्रहादयः क्रमाव ।।७२।। ततो हि योजनानां च लक्षे लक्ष गते सति ।। ज्योतिषां पुष्कराधे च वलयं स्यात्पृथक् पृथक् ॥७३॥ किन्तु चन्द्राश्च चत्वारो वलये वलये क्रमात । वर्धन्ते भानदो यावद्वलयं सप्तमं भवेत् ॥७४॥ पिण्डीकृतानि सर्वाणि सन्त्यष्टौ वलयान्यपि । मानुषोत्तरशैलार्बाह्यस्थ पुष्करार्धके ॥७॥ ततो योजनलक्षाधं प्रविश्य पुष्कराम्बुधौ । तदेवीमूलतस्तेषां नवमं वलयं भवेत् ॥७६॥ बलयेऽस्मिन् भवन्त्यष्टाशीत्याद्विशतप्रमाः । चन्द्रास्तावन्त प्रादित्याः समभागे व्यवस्थिताः ॥७७॥ ततोऽत्र योजनानां च लक्ष लक्ष गते क्रमात । पूर्वक्षेत्रं समावेष्टचारत्येक वलयं पृथक् ॥७॥ प्रत्रापि पूर्ववच्चन्द्राश्रत्वारो भानवस्तथा । पर्धन्तेऽमीग्रहायश्च वलयं वलयं प्रति ।।७।। अनेन विधिना सन्स्यसंख्यद्वीपाधिषु स्फुटम् । प्रसंख्यवलयान्येव चन्द्राविज्योतिषां क्रमात् ।।८०॥
SR No.090473
Book TitleSiddhantasara Dipak
Original Sutra AuthorBhattarak Sakalkirti
AuthorChetanprakash Patni
PublisherLadmal Jain
Publication Year
Total Pages662
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Philosophy, & Religion
File Size15 MB
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