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चतुर्थाधिकार कमल, कमल नाल, कमल कणिका का उत्सेधादि एवं कमल पत्र की लम्बाई:
कमलों का
नाल
। करिणका का
क्रमांक
सरोवरों के कमल
कमल पत्र की
लम्बाई
उत्सेध | व्यास | जलमग्न
ऊपर ।
- उत्सेध | ग्यास
१ योजन
| १० यो० ३ मो० ।।
कोश
१ कोच्च
१ पद्म द्रह का कमल २) महा पदम द्रह ३/ तिगिञ्छ ,, , ४ केसरी । ५महापुण्डरीक, , . ६/ पुण्डरीक , , .
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२० , १ , | २ कोश २
श्री प्रादि देवियों के भवनों का प्रमाण कहते हैं।
प्राद्याअणिकायां स्यात् वैडूर्य रत्नभास्वरम् । श्रीगृहं सन्मणिद्वारतोरणादिविभूषितम् ।।८५॥ मुक्तालम्बूषभूषाढय क्रोशापाममनोहर । कोशाधविस्तरं पावोनं क्रोशकोन्नतं शुभम् ।।१६।। ततोऽम्बुजद्वये सन्ति द्विगुणद्विगुणाः क्रमात् ।
गेहव्यासादयोऽन्येषु त्रिषु पाषु हानितः ।।८।। अर्थः-प्रथम सरोवर को पद्यकरिणका पर वैडूर्य मणियों की दीप्ति से दीपमान, उत्तम मरिणयों के तोरणद्वार प्रादि से विभूषित, लटकती हुई मुक्ता मालानों (मोतियों के फानूसों) से अलंकृत और मन को हरण करने वाला एक कोश लम्बा, प्राधा कोस चौड़ा एवं पौन कोस ऊँचा श्री देवी का भवन है । इसके प्रागे दो कमलों पर कम से दूने दुने विस्तार वाले और उससे मागे तीन कमलों पर क्रम से दुगनी हानि को लिये हुये व्यास प्रादि से युक्त भवन हैं ।।८५-८७।।