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________________ नमस्कार एगस्स सावगम्स पुत्तो पम्मं न लएति, सो य मावओ कालगओ, सो विवाहितो, एवं चेव विहरति, अष्णदा तेसिं दार नमस्कारन्याख्याहसमीपे परिवाओ आवासितो, सो तेण दारएण सम मित्तिर्ग करेति, अण्णदा सो परिचाओ तं दारगं मणति-जा णिरुवहर्त अणाघमतगं आणेह जा ते इस्सर करेमि, तेण मविलु, लद्ध, उबबद्धओ मणुस्सो, आणितो, मसाणं णीओ, जंचतत्थ पाउरंग, सोवि 1५८९॥ त्रिदत्यादि दारजो पिताए सिक्खावितो णमोक्कार, जाहे वो मेसि ताहे णमोक्कार करेज्जासिति, सो तस्स मतगस्स पुरतो ठवितो, मवगस्स 3] य हत्ये असी दिण्णो, परिवाओ विजं परिवत्तेति, वंतालो उद्वेतुमारद्धो, सो दारओ मीओ णमोक्कार परियट्रेति, मो वेतालो पडिओ, पुणो जवेति, पुणोवि उडिओ, सुठुतरागं परियट्रेति, तिदंडी पुम्छति- किंचि जाणसि ?, सो भणति-ण जाणामि, एवं | सुचिरं वङ्कनि , वाणमंतरेण रुद्रुण सो तिदंडी दोखंडो कनो, सुवण्या खोडी जाता, अंगोवंगाणि से जुत्तगाणि, सवरति वृद्ध, ईसरो जाओ णमोक्कारफलेण, जदि णमोक्कारोण होनो तो वेतालेण मारिजंतो, सोवणं जातं । एत्तो कामणिफसीए सादेव्वं, | कहं १, एगा साविया, तीसे मत्थारो मिच्छादिडिओ अण्ण मज्ज आणतुं मग्गति, तीसच्चएणं ग लमति ससवत्तम, चिंतेति-&I | किह मारिज्जामित्ति , अण्णदा तेण कण्हसप्पो घडए छुभित्ता आणितो, संगोवितो, जिमिवो ममति आणेह पुष्पाणि अमगघडए | उवियाणि, सा पविट्ठा, अंधकारंनि णमोक्कार करेति, जदि किंचिति खाएज्जा तोवि मरतीए णमोक्कारो म गस्सिहिति, हत्यो | छुद्दो, सप्पो देवताए अवहितो, पुप्फमाला साहिया, ताए गहिया, दिण्णा य, सो संमंतो चिंतेति-अण्णाणि, कहियं, गतो पेच्छति घडम पुष्फर्गम, णवि एत्व कोई सप्पो, ताहे जाउहो पादपडितो सच कहेति स्वामेति य, पच्छा सा चेव घरसामिणी जाता, द एवं कामावहो ॥ RS
SR No.090462
Book TitleAgam 40 Mool 01 Aavashyak Sutra Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRushabhdev Keshrimal Jain Shwetambar Sanstha Ratlam
PublisherRushabhdev Kesarimal Jain Shwetambar Sanstha
Publication Year1985
Total Pages617
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Conduct, & agam_aavashyak
File Size18 MB
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