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________________ IP उग्गविस डाहजरकाराए जहा कामदेवस्म, नेहिषि ण सका । पन्छा मसए विउबर, ते तिक्खाहिं दाढहिं दसंति, खंडाणि य आवश्यक अवणेता तत्थव कामिरति मुनपुरिम, नो अतुला वेयणा । जाहे सका ताहे हत्थिरूचं विउन्धति, जहा कामदेवे, तेण हत्यिरूपेण संगमक चूणा सोंडाए गहाय सत्तट्टतले आगाम उचिहिना पच्छा दंतमुसलहिं पडिग्छति, पुणोवि भूमीए ओविंधति, चलणतलेहिं मंदरगरुएहिं का उपसगोः साल मलेति । जाहेण सका नाहे हस्थिणियाम्यं विउन्नति, ताह हथिणिया मुंडएहिं देतेहिं विधति फालेति य, पच्छा कातितण सिंचति. नियुक्ती तिमि य मुचचिक्खाल्लं ग्यारे पाडना चलणहि मलेति । जाहेण सका ताहे पिसायरूचं पिउवात, जहा कामदेवस्स, तेण उबसग्ग ॥३०५ किरति । जाहे ण मका नाहे बम्बस्त्र विउधति, सो दाढाहि य नक्खेहि य फालेति, खारकाइएण य सिंचति । जाहे ण सका ताहे * सिद्धत्थरायरूत्रं विउचनि, मो कट्टाणि कलुगाणि विलयति--एहि पुत्तगा 1, विभासा, मा उज्झाहि । ताहे तिसलाविभासा ! जाहेर सण सका ताहे सून, किह ?, सो नतो संधावार विउधति, सा परिपरंतेसु आयासितो, तस्थ सूतो पत्थरे अलभंतो दोहवि पादाण ४ | मज्झ बजरिंग जालना पायाण उवरि उक्सलियं काउं पयही । जाहे एएणविण मका तओ पकणं विउबति, सो ताणि पंजरगाणि बाहासु गलए य कनमु य ओलएति, ने सउणा गातं तुंडहिं खायति बिंधति य, सम्म काइयं च चोसिरंति । पच्छा खरवायं विउव्वति, जण मको मंदाधि चालेउ, न पुग मामो चलइ, तेणुविहिता २ पाडेति । पच्छा कलंकलितावायं विउन्यति, तेण जहा चकाइदओ तहा भमाहिज्जइ, णत्तिआवेन था । गर्वपि ण सका नाहे कालचकं विउब्बति, तं विउधिऊण उट्ठ गगणगतलं गतो एतादृणं मारमिनि मुयनि बजामणिसंनिभ, ज मंदरपि चुरेज्जा, तेण पहारेण भगवं वाव निम्बुड्डो जार अग्गणहा। हत्याणं । जाहे तेणवि ण सको ताई नितेति-न सको एम मारेउंति अणुलोमे करेमि | ताहे सामाणियदेविष्टि देवो दाएति, सो Xxx ॥३ ।
SR No.090462
Book TitleAgam 40 Mool 01 Aavashyak Sutra Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRushabhdev Keshrimal Jain Shwetambar Sanstha Ratlam
PublisherRushabhdev Kesarimal Jain Shwetambar Sanstha
Publication Year1985
Total Pages617
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Conduct, & agam_aavashyak
File Size18 MB
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