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________________ W ला ऋषभम्य जन्म एस्थ-जम्मणः ॥ २.११॥ नेणं कालेणं तणं ममएणं अहेलोगवन्थव्याओ अडदिमाकुमारिमहत्तरिगाओ सएहिं२ कूडेहिं आवश्यक सिएहिं २ मवणेहि माहि २ पामादवडसएहिं पत्तयं पतेयं चउहि मामाणियमहम्सेहिं चउहि य महत्तरियाहिं सपरिवाराहि मत्तहि उपोद्घात | अणिएहिं ससहि अणियाहिवनीहि मोलमहिं आयरवदेवमाहम्सीहिं अन्नेहि य बहिं वाणमंतरेहिं देवेहि य देवीहि य मद्धिं संनियुक्ती | परिचुडा महताहयणट्टगीतवादित जाव भोगभोगाई भुंजमाणीओ विहरंति, तंजहा भोगकरा भोगवती सुभोगा मोगमालिणी। तोय॥१३६॥ धारा विचित्ता य, पुप्फमाला अणिदिया ॥१॥ तएणं नासि भगवते तित्यगर ममुप्पन्ने य पत्तेयं २ आसणाई चलंनि, ताणि पासेता ओहि पनि, भगवं निन्थगरं ओहिणा भोएंनि, मोएत्ता ताहे पणामं करेंति, जहा बदमाणसामिस्स सके जाव संकप्ये समुप्पज्जित्या, उप्पन्ने खलु भा जंबुहीवे भगवं तित्थगरे, न जीतमेनं तीतपच्चुप्पन्नमणागयाण अहोलागवत्यव्वाणं अट्टण्हं दिसाकुमारिमहत्तरियाणं जम्मणमहिमं करिनएत्ति, तं गच्छामो णं अम्हेऽवि भगवतो जम्मणमहिम करेमोत्तिकटु एवं मंपेहेंति संपेहेना | पत्तेय २ अभितोग देवे महाति, २ खिप्पामेव मो अणेगखंभमयसंनिविट्ठ लीलहित एवं विमाणवन्नओ माणियब्बो जाव जोय-15 णविच्छिन्ने जाणत्रिमाणे विउवह । नेवि तहेव करेंति, तएणं ताओ हद्वतुट्ठ पत्चर्य पचेयं चउहिं सामाणियसाहस्सीहिं जाव अन्नेहि य बहिं देवेहि य देवीहि य सद्धि संपरिबुडाओ ते दिब्बे जाणविमाणे दुरुहिति, दुरुहिता सव्विड्डीए सध्वजुत्तीए जाव| घणमुदिंगपवादितरवणं वाए उकिट्ठाए जाब देवगतीए जेणेव भगवतो जम्मणत्थाणे तेणेव उवागच्छित्ता तं ठाणं तेहिं दिव्वेहि जाणविमाणेहिं तिक्मुत्तो आयाहिणं पयाहणं करेंति, करेला उत्तरपुरच्छिमे दिमीमागे ईसि चउरंगुलमसंपचे धरणितले ते दिव्वे विमाणे ठवेंति ठावेत्ता पत्नेयं पत्त्यं चउहिं मामाणिय जाव पडिबुडाओ विमाणाहिंतो पच्चीसहिता सचिट्ठीए जाव नादितरवेणं SRCASSESEARSONA% ॥१३६॥
SR No.090462
Book TitleAgam 40 Mool 01 Aavashyak Sutra Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRushabhdev Keshrimal Jain Shwetambar Sanstha Ratlam
PublisherRushabhdev Kesarimal Jain Shwetambar Sanstha
Publication Year1985
Total Pages617
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Conduct, & agam_aavashyak
File Size18 MB
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