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________________ A1 % उपोद्घात नियुक्ती | हाणी य अवनवादोय, एरिसनि अन्नानाविण लभनि, एवं आयरियंपि, मीमा पाडिच्छगा करेहिन्ति, पाडिच्छगा मीसत्ति, चर्चा || |गामीरीआवश्यक दितिया पसत्या, बभणम्म दुमिहितिनि, गावी य पुणो मज्झवित्ति, चर्चा | एवं आयरिए मीसा चिंतति किं एतेहि?, अम्ह तुरटान्तो द एस मारो, णिज्जरा, आयरितो य माधृषण दाही पुणो अम्हांपत्ति, चर्चा एवं पाडिच्छगावि । भेरी मच्चे वासुदेवस्स भणिया, |जह सा जया सुविसुद्धगुणजुत्ता आमि तदा महन्धा आढिता, पच्छा विवरोया, एवं सीसेवि समोतारो। अहवा जहा वासुदेवेण | ॥१२४॥ गुणेहि देवावि अक्खिसा भेरी य लदा एवं मीसो गुणवं गुरुं आराहेति सकज णिप्फादतित्ति, चर्चा ! आभीरी, आभीगे मंडीए उवरि ठिता घयगडं पणामेनि, हेवा में महिला परिच्छति. ती इतरम्म य अंतरागष्हनमुयनाणं | कहमवि पडितो भिन्ना, नाणि मंडंनि-नुमं दुग्गहितं, तुमे दुछु पणामितति, ताव मन्वं भूमि गय, परोप्परकोचो वेला फिट्टा अकाले| गच्छताणं सेसघयमुल्लं बहल्लाय चाहि महिना हाणी अवब्रा य, एवं चेव आलावए आयरिएण दिन अन्ने वा कुट्टितो मणितो-ण एवं, मणइ-तुर्म चेव एवं दिन्नी. मो मणति-ण देमि. तुमं विणामेसित्ति, कलहो, एवं समोतागे । बितिओ दवत्ति ओइन्नो, दोहिवि दवदवस्म कप्पगणि मरिनाणि, मणागं , मो आभीरो मणति-मए ण सुटु पणामितं, सा मगति-मए न सुगहितंति, ४ एवं आयरिएणवि आलावा दिन्नो, पच्छा आयरितो भणति-मा एवं कुदेहि, प्रागेव मए आणुवउत्तेण दिन्नो, मो मगति-मते ग सुटु गहितोत्ति, चर्चा । अहवा आभीग जाणति-धारा एत्तिल्लिया घडए माहिति, एवं आयरितो जाणति एग दुर्गालावर्ग | P२॥ गहिहितित्ति एवं परिक्खिए मीसम्म देज्जा, दुमीसम्म विवेगो, चर्चा । RECE%kie% SACRE 4 % 4 +
SR No.090462
Book TitleAgam 40 Mool 01 Aavashyak Sutra Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRushabhdev Keshrimal Jain Shwetambar Sanstha Ratlam
PublisherRushabhdev Kesarimal Jain Shwetambar Sanstha
Publication Year1985
Total Pages617
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Conduct, & agam_aavashyak
File Size18 MB
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